द लोकतंत्र : मिडिल ईस्ट (Middle East) में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक टकराव ने भारतीय रसोई की महक यानी बासमती चावल के कारोबार को बड़ा झटका दिया है। दिल्ली का प्रसिद्ध ‘नया बाजार’, जो कभी विदेशी ऑर्डर्स से गुलजार रहता था, आज निर्यात ठप होने से मायूस है। युद्ध के कारण न केवल सप्लाई चेन टूट गई है, बल्कि अरबों रुपये का माल बीच रास्ते या गोदामों में फंसा हुआ है।
कहां अटका है भारत का माल?
निर्यातकों के अनुसार, स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। चावल एग्रो इंडिया के राहुल के मुताबिक, लगभग चार लाख टन बासमती चावल इस समय अलग-अलग जगहों पर फंसा हुआ है। इसमें से कुछ माल बीच समंदर में जहाजों पर है, तो कुछ बंदरगाहों (Ports) पर पड़ा है। ‘दिल्ली ग्रेन मर्चेंट’ के अध्यक्ष नरेश गुप्ता ने बताया कि केवल ईरान ही नहीं, बल्कि इराक, बहरीन, कुवैत और कतर जैसे देशों का बाजार भी पूरी तरह ठप हो गया है।
कीमतों में भारी गिरावट: 4 दिन में 10% टूटा बाजार
फरवरी के महीने तक बासमती की मांग बहुत मजबूत थी और कीमतें 10% तक बढ़ी हुई थीं। लेकिन युद्ध शुरू होते ही पासा पलट गया। चावल एग्रो इंडिया के अध्यक्ष राधेश्याम गर्ग बताते हैं कि पिछले महज चार दिनों में बाजार 10 प्रतिशत तक नीचे आ चुका है। निर्यात रुकने की वजह से घरेलू बाजार में भी बासमती की कीमतें 5 से 6 प्रतिशत तक गिर गई हैं, जिससे व्यापारियों और किसानों में चिंता बढ़ गई है।
दुबई के बड़े ऑर्डर और पेमेंट का झंझट
व्यापारियों को उम्मीद थी कि दुबई में हुए हालिया फूड इवेंट से मिले भारी ऑर्डर्स से इस साल रिकॉर्ड कमाई होगी, लेकिन युद्ध ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
- पेमेंट का डर: अमेरिकी प्रतिबंधों की आशंका और युद्ध के कारण ईरानी खरीदारों से पेमेंट मिलने में भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है।
- इंश्योरेंस की समस्या: कमर्शियल जहाजों को अब इस क्षेत्र में जाने के लिए इंश्योरेंस कवर नहीं मिल रहा है, जिसके कारण सारी शिपमेंट रोक दी गई हैं।
ईरान: भारतीय बासमती का सबसे बड़ा खरीदार
भारतीय बासमती का सबसे बेहतरीन उत्पादन पंजाब और हरियाणा में होता है और हमारे कुल निर्यात का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों को जाता है।
- ईरान की हिस्सेदारी: भारत के कुल बासमती निर्यात का 25 प्रतिशत अकेला ईरान खरीदता है।
- आंकड़ों की बात: वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को करीब 6,374 करोड़ रुपये का बासमती बेचा था। इतने बड़े बाजार का अचानक बंद होना भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ती अनिश्चितता ने भारतीय निर्यातकों को ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में डाल दिया है। अगर यह तनाव जल्द नहीं थमा, तो भारतीय बासमती उद्योग को लंबे समय तक इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

