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4 New Labour Codes लागू होने से नाइट शिफ्ट की मिली अनुमति, ओवरटाइम पर मिलेगा पुरुषों जितना दोगुना भुगतान

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द लोकतंत्र : केंद्र सरकार ने श्रम सुधारों की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, पाँच साल पहले संसद से पारित किए गए चार नए श्रम संहिता कानूनों (New Labour Codes) को आखिरकार लागू कर दिया है। इन चार कोड—मजदूरी कोड (Code on Wages), इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड (Industrial Relations Code), सोशल सिक्योरिटी कोड (Social Security Code) और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड (OSH Code)—के क्रियान्वयन के साथ ही देश के 29 पुराने श्रम कानून समाप्त हो गए हैं। सरकार का दावा है कि यह सुधार श्रमिकों को अधिक सुरक्षा, स्पष्ट नियम और बेहतर सामाजिक संरक्षण देने के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

ग्रेच्युटी और कार्य समय में महत्वपूर्ण बदलाव

नए लेबर कोड का सबसे बड़ा प्रभाव ग्रेच्युटी के नियमों पर पड़ा है, जो कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत है:

  • ग्रेच्युटी पात्रता: पहले किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए पाँच साल की निरंतर सेवा जरूरी थी, जिसे अब घटाकर सिर्फ एक साल कर दिया गया है। इससे फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सीधा और व्यापक लाभ मिलेगा।
  • कार्य समय और ओवरटाइम: नए नियमों के तहत, हफ्ते में 48 घंटे कार्य समय तय किया गया है। कंपनियां प्रतिदिन 8 से 12 घंटे काम करा सकती हैं। ओवरटाइम की स्थिति में कंपनियों के लिए दोगुना वेतन (Double Pay) देना अनिवार्य होगा, जो पहले से मौजूद कई विसंगतियों को दूर करेगा।

पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार

नए श्रम कानूनों के लागू होने से कार्यस्थल पर पारदर्शिता (Transparency) और सामाजिक सुरक्षा (Social Security) का दायरा बढ़ा है:

  • न्यूनतम मजदूरी का अधिकार: अब सभी कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी एक कानूनी अधिकार बन गई है। किसी भी सेक्टर के कर्मचारी को न्यूनतम वेतन से कम भुगतान नहीं किया जा सकेगा।
  • अनिवार्य दस्तावेज़: हर कर्मचारी को नियुक्ति के समय अपॉइंटमेंट लेटर देना अब अनिवार्य है, जिससे नौकरी की शर्तों में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
  • ईएसआईसी कवरेज: ईएसआईसी (Employees’ State Insurance Corporation) कवरेज को अब छोटे और खतरनाक कार्यस्थलों सहित सभी जगहों पर अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे चिकित्सा और बीमा सुरक्षा का दायरा व्यापक हो सके।

महिलाओं और नए कार्यक्षेत्रों को संरक्षण

यह सुधार महिलाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों के लिए विशेष महत्व रखता है:

  • महिला सुरक्षा: महिलाओं को पर्याप्त सुरक्षा प्रबंधों के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है। साथ ही, उन्हें ओवरटाइम के लिए पुरुषों की तरह दोगुना भुगतान मिलेगा।
  • औपचारिक संरक्षण: नए लेबर कोड में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों, डिजिटल और ऑडियो-विज़ुअल मीडिया वर्कर्स, बागान मजदूरों और डबिंग आर्टिस्ट को भी औपचारिक श्रम संरक्षण के दायरे में शामिल किया गया है। यह कदम इन क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को नियमित रोजगार सुरक्षा और स्पष्ट श्रम अधिकार प्रदान करेगा।

नए कानूनों के क्रियान्वयन से देश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा में भी सुधार आने की उम्मीद है, जिससे संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।

Team The Loktantra

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