द लोकतंत्र : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा इस वर्ष रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की आक्रामक कटौती के बाद देश के बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज दरों को घटाने की होड़ मच गई है। जहाँ एक ओर भारतीय स्टेट बैंक (SBI), ICICI बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे दिग्गजों ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दरों में कमी की है, वहीं डाकघर की सावधि जमा (TD) योजना अभी भी निवेशकों के लिए एक मजबूत गढ़ बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की अस्थिरता के बीच गारंटीड रिटर्न चाहने वाले मध्यम वर्ग के लिए पोस्ट ऑफिस की योजनाएं अब बैंकों की तुलना में अधिक आकर्षक हो गई हैं।
रेपो रेट का बैंकों पर तत्काल प्रभाव पड़ता है, किंतु पोस्ट ऑफिस की दरें केंद्र सरकार द्वारा त्रैमासिक आधार पर निर्धारित होती हैं। वर्तमान में पोस्ट ऑफिस की 5-वर्षीय टीडी योजना 7.5 प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर प्रदान कर रही है।
- यदि कोई निवेशक ₹2,00,000 की राशि 5 वर्षों के लिए जमा करता है, तो मैच्योरिटी पर उसे ₹89,990 केवल ब्याज के रूप में प्राप्त होंगे।
- बैंकों की शॉर्ट-टर्म FD के विपरीत, पोस्ट ऑफिस की 5-वर्षीय योजना आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कर छूट के लिए योग्य है, जो इसे दोहरा लाभ प्रदान करती है।
RBI के फैसले के बाद प्रमुख बैंकों ने अपने बेंचमार्क रेट में संशोधन किए हैं:
- SBI: देश के सबसे बड़े बैंक ने अपनी दरों को 6.45% से घटाकर 6.40% कर दिया है। सीनियर सिटिजन्स के लिए भी उपलब्ध ब्याज अब 7% के नीचे आ गया है।
- ICICI बैंक: यहाँ सामान्य ग्राहकों के लिए अधिकतम ब्याज 6.60% के आसपास सिमट गया है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को 7.20% तक का लाभ मिल रहा है।
- बैंक ऑफ बड़ौदा एवं इंडियन बैंक: इन संस्थानों ने अपने रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) में गिरावट की है, जिसका सीधा असर जमा कर्ताओं के ब्याज पर दिखाई दे रहा है।
आर्थिक विश्लेषकों का सुझाव है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लानी चाहिए। रेपो रेट में गिरावट से ऋण तो सस्ता हुआ है, किंतु बचतकर्ताओं के लिए चुनौतियां बढ़ी हैं। ऐसी स्थिति में पोस्ट ऑफिस की योजनाएं सुरक्षा और बेहतर रिटर्न का एक आदर्श संतुलन प्रस्तुत करती हैं।
निष्कर्षतः, यदि आप दीर्घकालिक और जोखिम-मुक्त निवेश की तलाश में हैं, तो पोस्ट ऑफिस की सावधि जमा योजनाएं वर्तमान बैंकिंग परिदृश्य में निश्चित रूप से अग्रणी हैं।

