द लोकतंत्र : रिटायरमेंट के बाद बिना किसी आर्थिक तंगी के जीना हर किसी का सपना होता है। लेकिन इस सपने को सच करने के लिए सही समय पर सही फैसले लेना बहुत जरूरी है। अगर आप भी अपनी दूसरी पारी की तैयारी कर रहे हैं, तो ये बातें आपके काम आ सकती हैं।
सबसे पहले अपनी आर्थिक स्थिति को परखें
रिटायरमेंट के करीब पहुँचते ही सबसे पहला काम यह होना चाहिए कि आप अपनी पूरी जमा-पूंजी का हिसाब लगाएं। आपके पास कितनी सेविंग्स है, पेंशन कितनी मिलेगी और अलग-अलग जगहों पर किए गए निवेश (Investments) की आज की वैल्यू क्या है?
इन सबको एक साथ जोड़कर देखें कि क्या यह रकम आपके आने वाले 20-25 सालों के लिए काफी है? अगर आपको लगता है कि फंड कम पड़ सकता है, तो अभी से अपनी निवेश योजना में थोड़े बदलाव करें ताकि आगे चलकर हाथ तंग न रहे।
फिजूलखर्ची पर लगाएं लगाम
जब हम नौकरी में होते हैं, तो हाथ खुला रहता है। अक्सर बाहर खाना, महंगे गैजेट्स खरीदना या बिना सोचे-समझे शॉपिंग करना आदत बन जाती है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद इनकम के स्रोत सीमित हो जाते हैं।
इसलिए, बेहतर होगा कि रिटायर होने से 2-3 साल पहले ही अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव शुरू कर दें। गैरी जरूरी खर्चों को कम करें और सादगी से रहने की आदत डालें। इससे न सिर्फ आपकी बचत बढ़ेगी, बल्कि रिटायरमेंट के बाद आपको मानसिक तनाव भी नहीं होगा।
हेल्थ इंश्योरेंस को न करें नजरअंदाज
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में छोटी-मोटी दिक्कतें आना आम बात है। आजकल मेडिकल खर्च इतना बढ़ गया है कि एक बार अस्पताल में भर्ती होने पर उम्र भर की कमाई साफ हो सकती है।
रिटायरमेंट से पहले ही एक अच्छा ‘हेल्थ इंश्योरेंस’ जरूर ले लें। साथ ही, एक अलग से ‘इमरजेंसी मेडिकल फंड’ भी बनाएं। यह पैसा सिर्फ और सिर्फ अचानक आई किसी बीमारी या इलाज के लिए होना चाहिए। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि हेल्थ बैकअप होने से आपकी रिटायरमेंट लाइफ काफी हद तक चिंतामुक्त हो जाती है।
कर्ज मुक्त होकर करें शुरुआत
रिटायरमेंट की तरफ बढ़ते हुए कोशिश करें कि आप पर कोई बड़ा लोन (Home Loan या Car Loan) न रहे। अपनी रिटायरमेंट की एकमुश्त रकम (जैसे PF या Gratuity) का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में करने के बजाय, उसे निवेश के लिए बचाकर रखें। अगर आप कर्ज मुक्त होकर रिटायर होते हैं, तो आपकी पेंशन का पूरा हिस्सा आपकी जरूरतों और शौक को पूरा करने में काम आएगा।

