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Share Market Crash: पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग से दहला शेयर बाजार; सेंसेक्स 1097 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे करोड़ों

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द लोकतंत्र : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष का असर अब सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजार पर दिखने लगा है। शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को घरेलू शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों के बीच बढ़ते डर और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की कमर तोड़ दी। जहां कल बाजार में हरियाली थी, वहीं आज लाल निशान ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

सेंसेक्स और निफ्टी का हाल

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन BSE Sensex 1,097 अंक यानी 1.37 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 78,918.90 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय तो यह 1,200 अंकों से भी ज्यादा टूट गया था। वहीं, Nifty 50 भी अछूता नहीं रहा और 315 अंक (1.27%) लुढ़क कर 24,450.45 के स्तर पर आ गया।

क्यों गिरी बाजार की ‘इमारत’?

बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  1. मिडिल ईस्ट में तनाव: इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से दुनिया भर के निवेशक डरे हुए हैं।
  2. कच्चा तेल (Crude Oil): युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई रुकने का खतरा बढ़ गया है, जिससे Brent Crude 2.53% चढ़कर 87.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
  3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को बाजार से करीब 3,752 करोड़ रुपये निकाल लिए, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा।

इन शेयरों में मची सबसे ज्यादा लूट

गिरावट के इस दौर में बैंकिंग और दिग्गज कंपनियों के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा:

  • गिरने वाले शेयर: ICICI Bank, Axis Bank, HDFC Bank, SBI, अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई।
  • बढ़ने वाले शेयर: बाजार के इस तूफान में भी रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), सन फार्मा, इंफोसिस और HCL टेक जैसे शेयर हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे।

अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

जियोजित इन्वेस्टमेंट के शोध प्रमुख विनोद नायर का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत की महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है। इससे सरकार के चालू खाते के घाटे पर भी बुरा असर पड़ता है, जो अंततः आम आदमी की जेब और देश की मौद्रिक नीति को प्रभावित करता है।

शेयर बाजार फिलहाल पूरी तरह से ग्लोबल खबरों और युद्ध के हालात पर निर्भर है। विश्लेषकों की सलाह है कि ऐसे समय में छोटे निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए।

Team The Loktantra

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