द लोकतंत्र : भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) का सीधा असर आज दलाल स्ट्रीट पर दिखाई दिया। लगातार तीसरे दिन बाजार में हाहाकार मचा रहा और बिकवाली के भारी दबाव के चलते निवेशकों के लगभग 10 लाख करोड़ रुपये कुछ ही घंटों में डूब गए।
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन BSE Sensex 1470.50 अंक की भारी गिरावट के साथ 74,563 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 भी संभल नहीं पाया और 488.05 अंक टूटकर 23,151.10 के स्तर पर आ गया। बाजार की इस चौतरफा गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है।
बाजार में कोहराम के 4 बड़े कारण
1. कच्चे तेल की आग: ईरान की ओर से दो तेल टैंकरों पर हमले की खबर ने आग में घी का काम किया है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से सप्लाई रुकने के डर से ब्रेंट क्रूड की कीमत 100.5 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का मतलब है—महंगाई बढ़ना और कंपनियों का मुनाफा घटना।
2. ग्लोबल मार्केट से आए खराब संकेत: सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बाजारों में लाल निशान हावी है। एशिया के निक्केई और हैंग सेंग से लेकर अमेरिकी बाजार तक सब दबाव में हैं। अमेरिका का Dow Jones इस साल पहली बार 47,000 के नीचे बंद हुआ है, जिसका सीधा असर भारतीय सेंटीमेंट पर पड़ा।
3. विदेशी निवेशकों (FII) का भागना: विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा तेजी से निकाल रहे हैं। अकेले गुरुवार को उन्होंने करीब 7,049 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशक 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं, जो बाजार के लिए बड़ा झटका है।
4. रुपये की ऐतिहासिक गिरावट: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया आज अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। शुक्रवार को रुपया 12 पैसे और गिरकर 92.37 के रिकॉर्ड लो पर बंद हुआ। रुपये की कमजोरी विदेशी निवेशकों को डराती है और आयात को और महंगा बना देती है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया के हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में ऐसी ही अस्थिरता (Volatility) बनी रह सकती है। निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने की बजाय ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनानी चाहिए और फंडामेंटली मजबूत शेयरों पर नजर रखनी चाहिए।
निष्कर्ष: शेयर बाजार की यह गिरावट वैश्विक संकट का नतीजा है। आने वाले दिनों में युद्ध की खबरों और कच्चे तेल की चाल पर ही बाजार की दिशा निर्भर करेगी।

