द लोकतंत्र : वर्ष 2026 के प्रारंभिक सप्ताह में ही वैश्विक राजनीति एक अभूतपूर्व मोड़ पर आ खड़ी हुई है। 3 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला पर अमेरिकी नियंत्रण की घोषणा और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हिरासत ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपन पैदा कर दिया है। जहाँ रूस, ईरान और क्यूबा जैसे देश इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताकर निंदा कर रहे हैं, वहीं निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने और चांदी की ओर रुख किया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोमवार, 5 जनवरी को बाजार खुलते ही कीमतों में बड़ी उछाल देखने को मिल सकती है।
बाजार विश्लेषण: ऐतिहासिक ऊंचाई की ओर अग्रसर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने ने वर्ष 2026 की शुरुआत ही तेजी के साथ की है। वर्तमान में सोना 4,370 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले साढ़े चार दशकों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
- चांदी में भी तेजी: डॉलर की अपेक्षाकृत कमजोरी और औद्योगिक मांग में वृद्घि के चलते चांदी भी 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ मजबूत स्थिति में है।
- विशेषज्ञ मत: ब्रिकवर्क के रिसर्च हेड राजीव शरण का मानना है कि भू-राजनीतिक अस्थिरता और मुद्रास्फीति जैसे कारक सोने को निकट भविष्य में 4,500 से 5,000 डॉलर की रेंज तक ले जा सकते हैं।
भारतीय बाजार की स्थिति: वर्तमान दरें और आगामी चुनौतियां
यद्यपि शनिवार, 3 जनवरी को भारतीय बाजार में मामूली गिरावट देखी गई, किंतु यह शांति तूफान से पहले की आहहट प्रतीत होती है।
वर्तमान दरें (प्रति ग्राम):
- 24 कैरेट: ₹13,582 (गिरावट के बाद)
- 22 कैरेट: ₹12,450
- 18 कैरेट: ₹10,187
जियोपॉलिटिकल इम्पैक्ट: ऊर्जा और कमोडिटी संकट
- वेल्थ डायरेक्टर अनुज गुप्ता ने चेतावनी दी है कि वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्यवाही का असर सिर्फ बहुमूल्य धातुओं तक सीमित नहीं रहेगा। वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है।
- अमेरिकी कब्जे के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति बाधित होने की आशंका है, जिससे एनर्जी कमोडिटीज की कीमतों में अचानक उछाल आएगा। जब भी कच्चा तेल महंगा होता है, महंगाई बढ़ने के डर से निवेशक स्टॉक मार्केट से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं, जिससे सोना और महंगा होता जाता है।
निष्कर्षतः, वेनेजुएला संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक अस्थिर मुहाने पर धकेल दिया है। आगामी सप्ताह में भारतीय मध्यम वर्ग के लिए सोना खरीदना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। यदि रूस और ईरान जैसे सहयोगी देशों का विरोध सैन्य रूप लेता है, तो सोने की कीमतें सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ देंगी।

