द लोकतंत्र : इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच पिछले वर्ष 8 अक्टूबर से चल रही छिटपुट लड़ाई ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। इजरायल रक्षा बलों (IDF) ने रविवार (23 नवंबर) को लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाके दाहीये में एक बड़ा हवाई हमला किया। यह हमला इतना तेज था कि पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और कई महीनों बाद हुए इस बड़े हमले ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। IDF ने दावा किया है कि इस स्ट्राइक में हिज्बुल्लाह का चीफ ऑफ स्टाफ हायथम अली तबताबाई मारा गया है, हालांकि हिज्बुल्लाह की ओर से अभी इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
तबताबाई: हिज्बुल्लाह का प्रमुख रणनीतिकार
IDF के अनुसार, मारा गया हायथम अली तबताबाई हिज्बुल्लाह संगठन के लिए 1980 के दशक से काम कर रहा था और वह एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर था।
- प्रमुख भूमिकाएँ: तबताबाई ने हिज्बुल्लाह की खास यूनिट ‘रेडवान फोर्स’ की स्थापना की थी। उसने सीरिया में कई महत्वपूर्ण सैन्य ऑपरेशनों की जिम्मेदारी संभाली और पिछले साल इजरायल-लेबनान सीमा पर हुई लड़ाई का भी नेतृत्व किया था।
- पुरस्कार: बाद में उसे हिज्बुल्लाह का चीफ ऑफ जनरल स्टाफ बना दिया गया था। उसकी गतिविधियों के कारण ही, साल 2018 में अमेरिका ने उसके बारे में कोई भी जानकारी देने पर 50 लाख डॉलर का इनाम भी घोषित किया था, जिससे उसकी उच्च अहमियत का पता चलता है।
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच यह संघर्ष पिछले साल 8 अक्टूबर को गाजा में अपने सहयोगियों की मदद करने के उद्देश्य से हिज्बुल्लाह द्वारा शुरू किया गया था। सितंबर में इजरायल के ‘पेजर्स ऑपरेशन’ के बाद यह तनाव और भी बढ़ गया।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस एयर स्ट्राइक के बाद एक बयान जारी कर बताया कि हमले में कम से कम 5 आम नागरिकों की मौत हुई है और 20 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं। इस हमले से कई गाड़ियां और बिल्डिंगों को भी नुकसान पहुँचा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और तनाव की स्थिति
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इजरायल ने इस हमले की जानकारी पहले से अमेरिका को नहीं दी थी और वॉशिंगटन को इसकी सूचना हमले के बाद ही मिली। हालांकि, अमेरिका को यह अंदाजा था कि इजरायल जल्द ही लेबनान में कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
हिज्बुल्लाह के चीफ ऑफ स्टाफ के मारे जाने के दावे ने क्षेत्र में हालात और भी तनावपूर्ण कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर के कमांडर की मौत का दावा अगर सही साबित होता है, तो हिज्बुल्लाह की ओर से बड़ी और तेज प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है, जिससे मिडिल ईस्ट में एक बड़े संघर्ष की आशंका और बढ़ गई है। अब सबकी निगाहें हिज्बुल्लाह की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर लगी हुई हैं।

