द लोकतंत्र : पिछले पांच वर्षों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में निरुद्ध जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता उमर खालिद का मामला एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है। अमेरिका के सर्वाधिक प्रभावशाली शहरों में से एक, न्यूयॉर्क के नवनियुक्त मेयर जोहरान ममदानी ने उमर खालिद के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए एक हस्तलिखित पत्र साझा किया है। भारतीय मूल के ममदानी, जो न्यूयॉर्क के प्रथम मुस्लिम मेयर के रूप में इतिहास रच चुके हैं, ने यह पत्र अपने शपथ ग्रहण समारोह के ऐतिहासिक अवसर पर सामने लाकर एक गंभीर राजनीतिक संदेश दिया है।
ममदानी का संदेश: नफरत के विरुद्ध वैचारिक प्रतिरोध
उमर खालिद की सहयोगी बनोज्योत्सना लाहिरी द्वारा साझा किए गये इस पत्र में ममदानी ने उमर के परिवार के साथ अपनी मुलाकात का स्मरण किया है।
- मानसिक दृढ़ता की सराहना: ममदानी ने लिखा कि वे उमर के विचारों और उनके निरंतर संघर्ष से प्रेरित हैं। उन्होंने खालिद द्वारा नफरत और कड़वाहट के विरुद्ध दी गई दलीलों को रेखांकित करते हुए उनकी मानसिक अखंडता की प्रशंसा की।
- पूर्व समर्थन का इतिहास: उल्लेखनीय है कि ममदानी जून 2023 में भी न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य के रूप में उमर खालिद के समर्थन में आवाज उठा चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तत्कालीन अमेरिका यात्रा से पूर्व सार्वजनिक मंच से उमर खालिद के जेल से लिखे संदेशों का वाचन किया था।
अंतर्राष्ट्रीय दबाव एवं विधिक वस्तुस्थिति
उमर खालिद पर लगे आरोपों और उनकी लगातार अस्वीकृत होती जमानत याचिकाओं ने वैश्विक मानवाधिकार संगठनों का ध्यान आकर्षित किया है।
- अमेरिकी सांसदों का हस्तक्षेप: अतीत में 8 प्रमुख डेमोक्रेटिक सांसदों ने भारतीय राजदूत को औपचारिक पत्र लिखकर खालिद के मामले में निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई की मांग की थी।
- UAPA की चुनौतियां: 38 वर्षीय खालिद सितंबर 2020 से गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत हिरासत में हैं। विधिक विशेषज्ञों का तर्क है कि UAPA के कठोर प्रावधानों के कारण जमानत मिलना अत्यंत दुष्कर हो गया है, जिससे बिना दोषसिद्धि के ही वर्षों का कारावास एक मानक बनता जा रहा है।
कूटनीतिक प्रभाव और भविष्य का परिदृश्य
- जोहरान ममदानी का यह कदम भारत और अमेरिका के बीच के नागरिक कूटनीतिक संबंधों में एक नई कड़ी जोड़ता है। एक मेयर के रूप में उनका प्रभाव अब मात्र स्थानीय नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से वैश्विक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे हाई-प्रोफाइल समर्थन से भारत में विचाराधीन कैदियों की स्थिति और कठोर कानूनों के प्रयोग पर पुनर्विचार की बहस को बल मिलेगा।
निष्कर्षतः, उमर खालिद के प्रति जोहरान ममदानी की एकजुटता यह दर्शाती है कि भौगोलिक सीमाएं वैचारिक संघर्षों को रोकने में अक्षम हैं। जहाँ भारत सरकार इन मामलों को आंतरिक सुरक्षा का विषय मानती है, वहीं वैश्विक नेतृत्व इन्हें मानवाधिकारों के वैश्विक पैमानों पर परख रहा है। आगामी समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह अंतर्राष्ट्रीय सहानुभूति खालिद की विधिक स्थितियों में कोई परिवर्तन ला पाती है।

