द लोकतंत्र : पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर में सोमवार को अर्धसैनिक बल (Frontier Constabulary) के मुख्यालय पर बंदूकधारियों और आत्मघाती हमलावरों ने एक बड़ा और सुनियोजित हमला किया। रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, यह परिसर दो आत्मघाती बमबाजों के हमले का भी शिकार हुआ। त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बलों ने तुरंत ऑपरेशन चलाया। इस जवाबी कार्रवाई में सभी तीन हमलावरों को मार गिराया गया, हालांकि राष्ट्र ने अपने तीन बहादुर कर्मियों को भी इस अभियान के दौरान खो दिया।
हमले का तरीका और ऑपरेशन
यह हमला एक व्यस्त इलाके में मौजूद अर्धसैनिक बल के मुख्यालय पर हुआ, जो एक सैन्य छावनी के पास स्थित है।
- हमले की रणनीति: एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमलावरों ने समन्वित रणनीति अपनाई। पहला आत्मघाती बमबाज ने कांस्टेबुलरी के मुख्य एंट्री गेट पर हमला किया, जबकि दूसरा बमबाज परिसर में घुस गया। इसके बाद अन्य हमलावरों ने गोलीबारी शुरू कर दी।
- सुरक्षा घेरा: हमले के फौरन बाद, कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले कर्मियों—जिसमें सेना और पुलिस शामिल थी—ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया। नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि उन्होंने स्थिति को सावधानी से संभाला, क्योंकि उन्हें मुख्यालय के अंदर कुछ और आतंकवादियों के मौजूद होने का संदेह था। सुरक्षा कारणों से आसपास की सड़कों पर यातायात पर रोक लगा दी गई थी।
क्षेत्रीय तनाव और बढ़ते हमले
पेशावर में हुआ यह हमला पाकिस्तान में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और आंतरिक विद्रोह के संकट को उजागर करता है। पाकिस्तान की सुरक्षा बल बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी विद्रोह से जूझ रही हैं, जिसने 2024 में अब तक 782 जानें ली हैं।
- क्वेटा में हमले: इसी साल की शुरुआत में, क्वेटा में अर्धसैनिक बल के मुख्यालय के बाहर एक कार बम विस्फोट हुआ था, जिसमें कम से कम 10 लोग मारे गए थे। इसके अलावा, 3 सितंबर को क्वेटा में एक राजनीतिक रैली पर हुए आत्मघाती हमले में 11 लोग मारे गए थे।
- बढ़ती हिंसा: रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी से अब तक विभिन्न हमलों में 430 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें ज्यादातर सुरक्षा कर्मी हैं। मार्च में, बलोच लिबरेशन आर्मी ने एक ट्रेन का अपहरण किया और छुट्टी पर रहे सैनिकों की हत्या कर दी थी।
पेशावर में अर्धसैनिक बल के मुख्यालय पर हुआ यह हमला स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को जटिल और बहुआयामी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। देश की सुरक्षा एजेंसियाँ एक ओर सीमा पार आतंकवाद से, तो दूसरी ओर बलूचिस्तान और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में सक्रिय उग्रवादी समूहों से लड़ रही हैं। इस तरह के संवेदनशील ठिकानों पर हुए सफल हमले सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े करते हैं और सरकार को रणनीतिक सुरक्षा नीतियों की समीक्षा के लिए मजबूर करते हैं ताकि भविष्य में इस तरह के बड़े नुकसान को रोका जा सके।

