द लोकतंत्र : बसंत पंचमी, जिसे ‘श्री पंचमी’ या ‘ज्ञान पंचमी’ भी कहा जाता है, ऋतुराज बसंत के स्वागत का पर्व है। यह मौसम अपने साथ सुख, समृद्धि और चारों ओर प्राकृतिक सौंदर्य लेकर आता है। बसंत पंचमी के दिन हर तरफ पीली और सफेद रंगत दिखाई देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन इन्हीं दो रंगों को इतनी अहमियत क्यों दी जाती है? आइए जानते हैं इन रंगों के पीछे की धार्मिक और मनोवैज्ञानिक वजहें।
पीला रंग: ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक
बसंत पंचमी के समय खेतों में सरसों के पीले फूल लहलहाने लगते हैं, मानो प्रकृति ने खुद पीली चादर ओढ़ ली हो।
- शुद्धता और सादगी: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग शुद्धता और ज्ञान का प्रतीक है। यह रंग माँ सरस्वती को अत्यंत प्रिय है।
- दिमाग को करता है एक्टिव: मनोवैज्ञानिक रूप से पीला रंग सूर्य की किरणों जैसा होता है, जो अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर दिमाग को सक्रिय (Active) करता है। यह रंग मन में उत्साह और सकारात्मकता भर देता है।
सफेद रंग: शांति और पवित्रता की पहचान
पीले के साथ-साथ इस दिन सफेद रंग का भी बड़ा महत्व है। माँ सरस्वती, जिन्हें श्वेतवस्त्रा कहा जाता है, हमेशा सफेद वस्त्र धारण करती हैं।
- पवित्रता: सफेद रंग शांति, सच्चाई और भाईचारे का संदेश देता है। यह मन को शांत रखने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है।
- नकारात्मकता दूर करे: सफेद रंग जीवन में एक नई और साफ शुरुआत की ओर इशारा करता है, जो नकारात्मक विचारों को मन से बाहर निकाल देता है।
बसंत पंचमी का खास ‘पीला और सफेद’ भोग
इस दिन न केवल कपड़े, बल्कि खाने की थाली भी रंगों से सजी होती है। माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए विशेष पकवान बनाए जाते हैं:
- पीला भोजन: इस दिन घरों में केसरिया मीठा भात (चावल), केसरिया हलवा, पीली खिचड़ी और सरसों का साग बनाया जाता है। ये चीजें न केवल देखने में सुंदर होती हैं, बल्कि बदलते मौसम में शरीर को जरूरी गर्माहट और ऊर्जा भी देती हैं।
- सफेद भोग: माँ को सफेद रंग का भोग भी लगाया जाता है, जिसमें मखाने की खीर, नारियल की बर्फी या रसगुल्ले शामिल होते हैं। यह भोग मन की सात्विकता का प्रतीक माना जाता है।
बसंत पंचमी का त्योहार हमें सिखाता है कि जिस तरह प्रकृति पुराने पत्तों को छोड़कर नई कोंपलों के साथ खिल उठती है, उसी तरह हमें भी ज्ञान के प्रकाश में अपने जीवन को रंगों से भरना चाहिए। इस बार 23 जनवरी को बसंत पंचमी के मौके पर आप भी पीले या सफेद वस्त्र पहनकर ज्ञान की देवी की आराधना जरूर करें।

