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ब्लूटूथ ईयरफोन और कैंसर: क्या वाकई खतरनाक है वायरलेस डिवाइस? जानें वायरल दावों के पीछे की असली सच्चाई

The loktnatra

द लोकतंत्र : आज के दौर में वायरलेस ईयरफोन या एयरपॉड्स हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं। चाहे ऑफिस की लंबी मीटिंग्स हों या वर्कआउट के दौरान गाना सुनना, ये डिवाइस हमेशा हमारे कानों में लगे रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से इंटरनेट पर एक डराने वाला दावा वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि ब्लूटूथ ईयरफोन से निकलने वाला रेडिएशन कैंसर का कारण बन सकता है और इसे पहनना अपने सिर के पास ‘माइक्रोवेव’ रखने जैसा है।

क्या वाकई ये छोटे से डिवाइस इतने जानलेवा हैं? आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स और विज्ञान इस बारे में क्या कहते हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

मिशिगन न्यूरोसर्जरी इंस्टीट्यूट के मशहूर न्यूरोसर्जन डॉ. जय जगन्नाथन ने हाल ही में इन दावों पर सफाई दी है। उन्होंने साफ किया कि ईयरफोन की तुलना माइक्रोवेव से करना पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

डॉ. जगन्नाथन के अनुसार, वायरलेस ईयरफोन से निकलने वाला रेडिएशन “नॉन-आयोनाइजिंग” (Non-Ionizing) होता है। विज्ञान की भाषा में इसका मतलब है कि इस रेडिएशन में इतनी ताकत नहीं होती कि वह हमारे शरीर के डीएनए (DNA) को नुकसान पहुँचा सके। और जब तक डीएनए को नुकसान नहीं पहुँचता, कैंसर होने का खतरा न के बराबर रहता है।

मोबाइल फोन से कहीं ज्यादा सुरक्षित

डॉक्टर का कहना है कि अगर हम तुलना करें, तो ब्लूटूथ ईयरफोन से निकलने वाला रेडिएशन आपके स्मार्टफोन के मुकाबले बहुत कम होता है। आंकड़ों की मानें तो एयरपॉड्स जैसे डिवाइस मोबाइल फोन के मुकाबले 10 से 400 गुना तक कम रेडिएशन पैदा करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, अगर मोबाइल फोन से अब तक कैंसर का कोई सीधा सबूत नहीं मिला है, तो ईयरफोन तो उससे कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं।

चूहों वाली उस रिसर्च का क्या?

कैंसर के दावों के पीछे अक्सर ‘नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम’ (NTP) की एक पुरानी स्टडी का हवाला दिया जाता है। इस रिसर्च में चूहों पर रेडिएशन का असर देखा गया था।

डॉ. जगन्नाथन बताते हैं कि इस स्टडी की बाद में अमेरिकी FDA (Food and Drug Administration) ने गहन समीक्षा की थी। एफडीए ने पाया कि चूहों को जिस मात्रा में रेडिएशन दिया गया था, वह इंसान के वास्तविक जीवन में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस से बहुत ज्यादा था। इसलिए, उस रिसर्च के आधार पर यह कहना गलत है कि इंसानों को ईयरफोन से कैंसर हो सकता है।

निष्कर्ष: क्या डरने की जरूरत है?

फिलहाल मौजूद वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर यह साबित नहीं हुआ है कि ब्लूटूथ ईयरफोन कैंसर पैदा करते हैं। हालांकि, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का बहुत ज्यादा इस्तेमाल कान की सुनने की क्षमता या कान के इन्फेक्शन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए सुरक्षा के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल सीमित समय के लिए करें और वॉल्यूम को कम रखें।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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