द लोकतंत्र : समकालीन युग में डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता और अनियंत्रित दिनचर्या ने एक नई शारीरिक समस्या को जन्म दिया है—आंखों और माथे में निरंतर बना रहने वाला दर्द। चिकित्सा सांख्यिकी के अनुसार, शहरी आबादी का हर तीसरा व्यक्ति इस पीड़ा से ग्रसित है। जहाँ कई लोग इसे सामान्य ‘स्ट्रेस’ मानकर पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह दर्द साइनस, माइग्रेन या ग्लूकोमा जैसी गंभीर व्याधियों का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। समय रहते इसका निदान न करना न केवल दृष्टि को प्रभावित कर सकता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी संकट उत्पन्न कर सकता है।
साइनस और माइग्रेन का अंतर्संबंध
आंखों के पीछे और माथे के अग्र भाग में होने वाला दर्द अक्सर दो प्रमुख रोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करता है।
- साइनस (Sinusitis) का प्रभाव: आरएमएल हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के निदेशक प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, साइनस में संक्रमण या सूजन होने पर चेहरे की कैविटीज में दबाव बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप माथे और आंखों के आसपास असहनीय भारीपन महसूस होता है। यह दर्द झुकने पर या सुबह उठने पर अधिक तीव्र हो जाता है।
- माइग्रेन (Migraine) की जटिलता: माइग्रेन केवल सिरदर्द नहीं है; यह एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें सिर के एक हिस्से के साथ-साथ आंखों के भीतर ‘पल्सेटिंग’ (धड़कन जैसा) दर्द होता है। इसके साथ मतली और प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता (Photophobia) जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।
डिजिटल आई स्ट्रेन: 21वीं सदी की महामारी
लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहने से आंखों की सिलियरी मांसपेशियां थक जाती हैं, जिसे ‘कंप्यूटर विजन सिंड्रोम’ कहा जाता है।
- दृश्य थकान (Visual Fatigue): स्मार्टफोन और लैपटॉप से निकलने वाली ‘ब्लू लाइट’ रेटिना पर दबाव डालती है, जिससे आंखों में जलन और माथे में जकड़न महसूस होती है।
- रक्तचाप और डिहाइड्रेशन: उच्च रक्तचाप (Hypertension) और शरीर में जल की कमी भी मस्तिष्क और आंखों की नसों में तनाव पैदा करती है, जो अंततः माथे के निचले हिस्से में दर्द के रूप में परिलक्षित होता है।
निवारक रणनीतियां और भविष्य का परिदृश्य
- विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक ‘डिजिटल डिटॉक्स’ और ‘ऑप्टिकल हाइजीन’ प्राथमिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं में शामिल हो जाएंगे। बचाव के लिए 20-20-20 नियम का पालन करना (हर 20 मिनट में 20 फीट दूर 20 सेकंड तक देखना) अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, पर्याप्त जलापूर्ति और साइनस के मरीजों के लिए प्रदूषण व धूल से बचाव महत्वपूर्ण है। यदि दर्द के साथ धुंधलापन, तीव्र बुखार या आंखों में लालिमा जैसे ‘रेड फ्लैग’ लक्षण दिखाई दें, तो विशेषज्ञ परामर्श में विलंब करना घातक हो सकता है।
निष्कर्षतः, आंखों और माथे का दर्द केवल एक शारीरिक लक्षण नहीं, बल्कि शरीर द्वारा दी जा रही एक चेतावनी है। जीवनशैली में सूक्ष्म परिवर्तन, जैसे नियमित नेत्र परीक्षण और तनाव प्रबंधन के लिए योग, इस समस्या को जड़ से समाप्त कर सकते हैं। याद रखें, आपकी दृष्टि और एकाग्रता आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है; इसे अनदेखा करना आपके भविष्य की उत्पादकता को दांव पर लगाने जैसा है।

