द लोकतंत्र : गर्दन का काला होना या उसके आसपास की त्वचा का गहरे रंग में बदलना एक आम समस्या है। कई बार लोग इसे केवल धूप, गंदगी या पसीने का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यह समस्या शरीर के भीतर हो रहे गंभीर बदलाव का संकेत भी हो सकती है।
गर्दन का कालापन न सिर्फ दिखने में परेशानी पैदा करता है, बल्कि यह कई स्वास्थ्य समस्याओं की तरफ इशारा करता है। इसलिए इसे हल्के में लेना आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं है।
गर्दन में कालापन होने के प्रमुख कारण
धूल और पसीना – गर्दन की स्किन चेहरे से ज्यादा सेंसिटिव होती है। उस पर धूल और पसीना आसानी से जम जाते हैं, जिससे त्वचा काली पड़ सकती है।
अनहेल्दी डाइट – ज्यादा जंक फूड, शुगर और प्रोसेस्ड फूड खाने से त्वचा की हेल्थ प्रभावित होती है।
हार्मोनल असंतुलन – PCOS जैसी बीमारियों में इंसुलिन का लेवल बढ़ने लगता है, जिससे गर्दन का रंग काला हो सकता है।
डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस – ब्लड शुगर लेवल बढ़ने पर गर्दन में कालापन होना आम है।
कुशिंग सिंड्रोम – इसमें शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे स्किन डार्क हो सकती है।
अकन्थोसिस निगरिकन्स (Acanthosis Nigricans) – यह स्थिति मोटापे, डायबिटीज या हार्मोनल बदलाव के कारण होती है और गर्दन की त्वचा काली पड़ जाती है।
मोटापा – ज्यादा वजन गर्दन में कालेपन का बड़ा कारण है।
कौन सी बीमारियों का संकेत है गर्दन का कालापन?
डायबिटीज – ब्लड शुगर और इंसुलिन का असंतुलन।
PCOS – महिलाओं में हार्मोनल बदलाव और अनियमित पीरियड्स के साथ डार्क नेक होना।
कुशिंग सिंड्रोम – हार्मोनल असंतुलन और शरीर में अतिरिक्त कॉर्टिसोल।
Acanthosis Nigricans – मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का संकेत।
बचाव के उपाय
नियमित सफाई – गर्दन की डेली क्लीनिंग और स्क्रबिंग करें।
संतुलित आहार – हेल्दी फूड खाएं, जंक और ज्यादा शुगर से बचें।
वजन नियंत्रित करें – एक्सरसाइज और बैलेंस डाइट से मोटापा घटाएं।
डॉक्टर से सलाह – अगर गर्दन का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।

