द लोकतंत्र : देश की राजधानी दिल्ली न केवल अपनी राजनीति के लिए, बल्कि अपनी अनूठी पाक-कला विशेषकर ‘चाट’ के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। पुरानी दिल्ली की तंग गलियों से शुरू हुआ दही-भल्ले और आलू टिक्की का सफर आज एक व्यापक व्यवसाय बन चुका है। पाक विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली की चाट मात्र भोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक अनुभव है, जहाँ मसालों का संतुलन और बनाने की पारंपरिक विधि इसे अन्य शहरों से पृथक करती है। जनवरी 2026 के सर्द मौसम में, इन गर्म और चटपटी चाट ठिकानों पर भोजन प्रेमियों का तांता लगा हुआ है।
ऐतिहासिक ठिकाने: स्वाद की विरासत
दिल्ली की चाट संस्कृति में कुछ नाम ऐसे हैं जिन्होंने दशकों से अपनी गुणवत्ता को अक्षुण्ण रखा है।
- नटराज दही भल्ला कॉर्नर: चांदनी चौक स्थित यह दुकान वर्ष 1940 से संचालित है। यहाँ के नरम दही भल्ले और दाल की गुजिया अपनी मलाईदार बनावट के लिए जानी जाती है। सीमित मेन्यू होने के बावजूद, यहाँ की खट्टी-मीठी चटनियों का अनुपात इसे अद्वितीय बनाता है।
- प्रभु चाट भंडार (यूपीएससी चाट): शाहजहाँ रोड पर स्थित यह ठेला आज एक संस्थान बन चुका है। विशेषकर सिविल सेवा के अभ्यर्थियों और प्रशासकों के बीच लोकप्रिय इस जगह की टिक्की अपने खास मसालों के लिए जानी जाती है।
नवाचार और आधुनिकता: बदलता स्वरूप
जैसे-जैसे दिल्ली का विस्तार हुआ, चाट के स्वाद में भी नये प्रयोग जुड़ते गए।
- प्रिंस चाट कॉर्नर: ग्रेटर कैलाश स्थित यह स्थान अपनी ‘पालक पत्ता चाट’ के लिए क्रांतिकारी माना जाता है। कुरकुरे पालक के पत्तों पर दही और सौंठ का मिश्रण एक आधुनिक ट्विस्ट प्रदान करता है।
- बिट्टू टिक्की वाला (BTW): इन्होंने स्ट्रीट फूड को मानकीकृत (Standardize) करके एक विशाल ब्रांड का रूप दिया है। स्वच्छता और गुणवत्ता पर फोकस करके इन्होंने मध्यम वर्ग के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई है।
पारंपरिक विशेषता: विशिष्ट व्यंजन
- पुरानी दिल्ली के बीचों-बीच स्थित ‘बिशन स्वरूप चाट भंडार’ आज भी अपने पारंपरिक ‘कुल्ले की चाट’ के लिए जाना जाता है। फलों और सब्जियों जैसे आलू, शकरकंद और अमरूद को अंदर से खोखला करके उसमें मसाले, चने और अनार भरना एक ऐसी कला है जो सिर्फ यहीं देखने को मिलती है। यह व्यंजन दर्शाता है कि चाट सिर्फ तलने के बारे में नहीं, बल्कि स्वाद के सटीक संयोजन के बारे में भी है।
निष्कर्षतः, दिल्ली का स्ट्रीट फूड क्षेत्र तेजी से एक संगठित उद्योग की ओर अग्रसर है। पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए ‘फूड वॉक’ एक प्राथमिक गतिविधि बन चुकी है। आगामी समय में इन ठिकानों का विस्तार न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक ‘सॉफ्ट पावर’ को भी वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेगा।

