द लोकतंत्र : उत्तर भारत में शीतलहर का प्रकोप बढ़ने के साथ ही जनजीवन और खान-पान की आदतों में व्यापक बदलाव देखा जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कड़ाके की ठंड में ठंडा पानी पीना न केवल गले के संक्रमण को न्योता देता है, बल्कि यह शरीर के आंतरिक तापमान (Core Temperature) को भी असंतुलित कर सकता है। दिल्ली एमसीडी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजय कुमार के अनुसार, इस मौसम में ‘गुनगुना पानी’ मात्र एक विकल्प नहीं, बल्कि शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है। यह पाचन तंत्र को सुदृढ़ करने से लेकर मानसिक सतर्कता बढ़ाने तक में सहायक सिद्ध हो रहा है।
शारीरिक क्रियाविज्ञान: गुनगुना पानी कैसे करता है काम?
मानव शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37°C होता है। सर्दियों में जब हम अत्यधिक ठंडा जल ग्रहण करते हैं, तो शरीर को उसे संतुलित करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा व्यय करनी पड़ती है, जिससे थकान और मेटाबॉलिज्म में गिरावट आ सकती है।
- पाचन और विषहरण (Detoxification): डॉ. कुमार बताते हैं कि गुनगुना पानी पीने से रक्त वाहिकाएं फैलती हैं, जिससे रक्त संचार (Blood Circulation) में सुधार होता है। यह भोजन में मौजूद वसा को तोड़ने में मदद करता है, जिससे कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं।
- मांसपेशियों और जोड़ों को राहत: सर्दियों में जोड़ों की जकड़न (Joint Stiffness) एक आम समस्या है। गुनगुने पानी का सेवन शरीर के ऊतकों को गर्माहट प्रदान करता है, जिससे मांसपेशियों के खिंचाव और पुराने दर्द में कमी आती है।
हाइड्रेशन का गणित: कितना और कैसे पिएं?
अक्सर सर्दियों में प्यास का अनुभव कम होता है, जो ‘साइलेंट डिहाइड्रेशन’ का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों ने जल सेवन के लिए एक मानक पैमाना निर्धारित किया है।
- निश्चित मात्रा: एक स्वस्थ वयस्क को कम से कम 2 से 3 लीटर जल का सेवन करना चाहिए। यद्यपि वातावरण ठंडा है, फिर भी सांस लेने और त्वचा के माध्यम से शरीर से नमी कम होती रहती है।
- सही समय: प्रातः काल खाली पेट 1-2 गिलास गुनगुना पानी पीना ‘मेटाबॉलिक बूस्टर’ का कार्य करता है। इसके अतिरिक्त, रात को सोने से पहले हल्का गर्म पानी पीना श्वसन तंत्र (Respiratory System) को साफ रखता है।
- संकेतों की पहचान: पेशाब का गाढ़ा या गहरा पीला होना इस बात का प्रमाण है कि आपके शरीर को अधिक जल की आवश्यकता है।
भविष्य का प्रभाव और जीवनशैली में बदलाव
- आगामी वर्षों में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण ‘थर्मल हाइड्रेशन’ एक वैश्विक रुझान बनने की संभावना है। पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग सर्दियों में पानी की मात्रा और तापमान का ध्यान रखते हैं, उनमें मौसमी फ्लू और वायरल संक्रमण की दर अन्यों की तुलना में 30% तक कम पाई गई है। साथ ही, बहुत अधिक कैफीन (चाय-कॉफी) के स्थान पर हर्बल टी या सादा गुनगुना पानी अपनाना दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
निष्कर्षतः, सर्दियों में गुनगुना पानी पीना एक सरल किंतु अत्यंत प्रभावशाली स्वास्थ्य मंत्र है। यह न केवल शरीर को बाहरी ठंड से लड़ने की शक्ति देता है, बल्कि आंतरिक अंगों की कार्यक्षमता को भी बनाए रखता है। प्यास लगने का प्रतीक्षा किए बिना, नियमित अंतराल पर जल ग्रहण करना ही 2026 की एक स्वस्थ दिनचर्या का आधार होना चाहिए।

