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Lifestyle Alert: जल्दबाजी में खाना निगलना सेहत के लिए घातक; स्लो ईटिंग से वजन नियंत्रण और बेहतर पाचन का खुला राज

The loktnatra

द लोकतंत्र : आज की अति-व्यस्त जीवनशैली में मनुष्य प्रत्येक कार्य में त्वरित परिणाम चाहता है, जिसका दुष्प्रभाव अब हमारी भोजन प्रणाली पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। चिकित्सा विशेषज्ञों और पोषण शास्त्रियों ने हालिया अध्ययनों के आधार पर चेतावनी दी है कि जल्दबाजी में भोजन ग्रहण करना न केवल पाचन संबंधी विकार उत्पन्न करता है, बल्कि मोटापे और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का भी प्रमुख कारक बन रहा है। ‘स्लो ईटिंग’ यानी भोजन को धीरे-धीरे और चबाकर खाना कोई पुरानी मान्यता नहीं, बल्कि एक पूर्णतः वैज्ञानिक प्रक्रिया है जो शरीर के भीतर सकारात्मक जैविक परिवर्तन लाती है।

पाचन विज्ञान: मुंह से प्रारंभ होती है प्रक्रिया

अधिकांश लोग यह मानते हैं कि पाचन की शुरुआत आमाशय (Stomach) में होती है, किंतु वास्तव में यह प्रक्रिया मुख से ही आरंभ हो जाती है।

  • एंजाइमों की भूमिका: जब हम भोजन को अधिक समय तक चबाते हैं, तो लार (Saliva) में मौजूद एमाइलेज जैसे एंजाइम कार्बोहाइड्रेट को तोड़ने का कार्य प्रारंभ कर देते हैं। यह भोजन को एक मुलायम पेस्ट में बदल देता है, जिससे आंतों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो जाता है।
  • पोषक तत्वों का एब्जॉर्प्शन: छोटे टुकड़ों में विभक्त भोजन से विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन का अवशोषण अत्यधिक प्रभावी ढंग से होता है। जल्दबाजी में खाया गया खाना पूर्णतः नहीं पच पाता, जिससे शरीर को उसका पूर्ण लाभ नहीं मिलता।

मस्तिष्क और तृप्ति: मोटापे का प्राकृतिक समाधान

वजन नियंत्रण के लिए भोजन की मात्रा के साथ-साथ उसकी गति भी समान रूप से उत्तरदायी है।

  • वैज्ञानिक तथ्य है कि आमाशय से मस्तिष्क तक ‘पेट भरने’ का संकेत पहुंचने में लगभग 20 मिनट का समय लगता है। यदि आप तेजी से भोजन करते हैं, तो मस्तिष्क को तृप्ति का संदेश मिलने से पूर्व ही आप आवश्यकता से अधिक कैलोरी का सेवन कर लेते हैं। इसके विपरीत, धीरे खाने से हार्मोनल संतुलन बना रहता है, जो ओवर-ईटिंग को रोककर वजन कम करने में सहायक सिद्ध होता है।

ओरल हेल्थ: दांतों और मसूड़ों का व्यायाम

भोजन को अच्छी तरह चबाना मुख की स्वच्छता के लिए भी वरदान है। चबाने की प्रक्रिया मसूड़ों के लिए एक प्राकृतिक कसरत की भांति कार्य करती है, जिससे दांतों की जड़ें मजबूत होती हैं। अधिक लार का उत्पादन मुंह के पीएच (pH) स्तर को बनाए रखता है और हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करता है, जिससे दुर्गंध और कैविटी जैसी समस्याएं नियंत्रित रहती हैं।

निष्कर्षतः, भोजन को मात्र पेट भरने का एक कार्य न मानकर इसे एक सचेत अनुभव बनाना चाहिए। धीरे खाना न केवल आपके पाचन को सुदृढ़ करता है, बल्कि यह मानसिक शांति और शारीरिक ऊर्जा का भी स्रोत है। नूतन वर्ष 2026 में अपने स्वास्थ्य के लिए समय निकालें और भोजन की हर चुस्की और कौर का आनंद लें।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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