द लोकतंत्र : उम्र बढ़ने के लक्षणों को रोकने के लिए अक्सर हम महंगे सौंदर्य प्रसाधनों और कठोर डाइट चार्ट का सहारा लेते हैं, किंतु एक बुनियादी कारक को अनदेखा कर दिया जाता है—वह है हमारी ‘स्लीप पोजिशन’ यानी सोने की मुद्रा। चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रात भर चेहरे पर पड़ने वाला मैकेनिकल प्रेशर (Mechanical Pressure) त्वचा की कोशिकाओं को गहराई से प्रभावित करता है। लगातार गलत पोजिशन में सोने से बनने वाली अस्थायी लकीरें समय के साथ स्थायी झुर्रियों में तब्दील हो सकती हैं, जिसे ‘स्लीप एजिंग’ कहा जाता है।
विशेषज्ञ विश्लेषण: रगड़ और गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव
पीएसआरआई अस्पताल के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. लक्ष्य भक्त्यानी के अनुसार, त्वचा की लोच (Elasticity) बाहरी दबाव के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती है।
- साइड और पेट के बल सोना: जब आप करवट लेकर या पेट के बल सोते हैं, तो आपका चेहरा तकिए के सीधे संपर्क में आता है। यह निरंतर दबाव त्वचा में रक्त प्रवाह को बाधित करता है और कोलेजन स्ट्रक्चर को तोड़ता है। डॉ. भक्त्यानी बताते हैं कि इसके परिणामस्वरूप गालों, माथे और ठुड्डी पर गहरी लकीरें उभरने लगती हैं।
- त्वचा का ढीलापन: करवट लेकर सोने से गुरुत्वाकर्षण (Gravity) चेहरे की त्वचा को नीचे की ओर खींचता है, जिससे जबड़े (Jowls) और गर्दन के पास त्वचा ढीली पड़ जाती है।
सूजन एवं कोलेजन का क्षय: दीर्घकालिक प्रभाव
सुबह उठते ही आंखों के पास दिखने वाली सूजन (Puffiness) केवल थकान का संकेत नहीं है।
- फ्लूड रिटेंशन: सोने के दौरान यदि सिर का स्तर शरीर के समान हो, तो चेहरे के ऊतकों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। लगातार होने वाली यह सूजन त्वचा को स्ट्रेच करती है, जिससे त्वचा का प्राकृतिक लचीलापन कम हो जाता है।
- स्थायी क्रीज: शुरुआत में ये निशान अस्थायी होते हैं, किंतु उम्र बढ़ने के साथ जब कोलेजन का उत्पादन धीमा होता है, तो ये लकीरें स्थायी झुर्रियों का रूप ले लेती हैं।
बचाव के उपाय: सिल्क कवर और सही पोस्चर
त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञ जीवनशैली में छोटे किंतु प्रभावी बदलावों की सलाह देते हैं:
- सुपाइन पोजिशन (पीठ के बल सोना): यह त्वचा के लिए सबसे सुरक्षित मुद्रा है। इससे चेहरे पर शून्य दबाव पड़ता है।
- सिल्क या सैटन के गिलाफ: सूती (Cotton) के कपड़े त्वचा के साथ घर्षण पैदा करते हैं। सिल्क के कवर का उपयोग करने से चेहरा तकिए पर फिसलता है, जिससे क्रीज नहीं बनती।
- एलिवेटेड स्लीपिंग: सिर को थोड़ा ऊंचा रखकर सोने से लिम्फैटिक ड्रेनेज बेहतर होता है और चेहरे की सूजन कम होती है।
निष्कर्षतः, एंटी-एजिंग की दिशा में नींद की सही मुद्रा उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि आपकी नाइट क्रीम। यदि आप आज से ही अपनी सोने की आदतों में सुधार करते हैं, तो भविष्य में महंगे कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की आवश्यकता को काफी हद तक टाला जा सकता है। याद रखें, अच्छी त्वचा की नींव एक सही नींद से शुरू होती है।

