द लोकतंत्र : महिलाओं के शरीर में मासिक धर्म या पीरियड्स एक अनिवार्य जैविक प्रक्रिया है, जो उनके प्रजनन स्वास्थ्य का दर्पण होती है। हालांकि, हाल के वर्षों में अनियमित पीरियड्स (Irregular Periods) की समस्या एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। अक्सर महिलाएं इसे सामान्य थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, किंतु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह अंदरूनी हार्मोनल असंतुलन या गंभीर बीमारियों का पूर्व संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जागरूकता ही फर्टिलिटी संबंधी भविष्य की बाधाओं को रोक सकती है।
कब सामान्य है देरी और कब खतरा?
आरएमएल अस्पताल में महिला रोग विभाग की डॉ. सलोनी चड्ढा के मुताबिक, पीरियड्स का चक्र अत्यंत संवेदनशील होता है।
- अत्यधिक मानसिक तनाव, यात्रा, अचानक वजन में बदलाव या नींद की कमी के कारण पीरियड्स में 4-5 दिनों की देरी सामान्य मानी जाती है।
- यदि पीरियड्स लगातार मिस हो रहे हैं, ब्लीडिंग अत्यधिक कम या ज्यादा हो रही है, या असहनीय पेट दर्द होता है, तो यह किसी बीमारी का लक्षण है। ऐसे में स्व-उपचार के बजाय चिकित्सीय परामर्श अनिवार्य हो जाता है।
PCOD से थायरॉइड तक का सफर
अनियमित चक्र अक्सर शरीर के भीतर पनप रही बीमारियों का परिणाम होता है:
- PCOD/PCOS: यह सबसे प्रमुख कारण है, जिसमें अंडाशय (Ovaries) में छोटी गांठें बन जाती हैं, जिससे अंडों का समय पर रिलीज होना बाधित होता है।
- थायरॉइड असंतुलन: थायरॉइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन मेटाबॉलिज्म के साथ मासिक धर्म को भी नियंत्रित करते हैं। हाइपोथायरायडिज्म अक्सर देरी का कारण बनता है।
- एनीमिया: शरीर में रक्त की कमी भी चक्र को प्रभावित करती है, जिससे कमजोरी और पीरियड्स की अनियमितता बढ़ जाती है।
लाइफस्टाइल में सुधार ही उपचार
डॉ. सलोनी चड्ढा ने बचाव के लिए ‘होलिस्टिक अप्रोच’ अपनाने पर बल दिया है:
- मैदा और अत्यधिक चीनी युक्त खाद्य पदार्थों के बजाय प्रोटीन और आयरन से भरपूर संतुलित आहार लें।
- प्रतिदिन 30 मिनट का योग या व्यायाम हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मददगार होता है।
- तनाव प्रबंधन के लिए ध्यान (Meditation) को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
फर्टिलिटी पर संकट
- चिकित्सा जगत चेतावनी देता है कि यदि अनियमित पीरियड्स का इलाज समय पर नहीं किया गया, तो भविष्य में गर्भधारण करने में जटिलताएं आ सकती हैं। प्रजनन क्षमता बनाए रखने के लिए नियमित जांच और स्वस्थ दिनचर्या ही एकमात्र विकल्प है।
निष्कर्षतः, पीरियड्स का समय पर न आना केवल एक तारीख की देरी नहीं, बल्कि आपके स्वास्थ्य का अलार्म है। इसे गंभीरता से लेना ही एक स्वस्थ भविष्य की नींव है।

