द लोकतंत्र : मकर संक्रांति सूर्य देव की उपासना का सबसे बड़ा त्योहार है। देश के अलग-अलग कोनों में इसे अलग-अलग नामों और परंपराओं से मनाया जाता है। उत्तर भारत में तो यह पर्व ‘खिचड़ी’ के नाम से ही मशहूर है। इस दिन खिचड़ी बनाना, सूर्य देव को भोग लगाना और दान करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि ग्रहों को शांत करने का एक जरिया भी है?
क्यों जरूरी है मकर संक्रांति पर खिचड़ी?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘उत्तरायण’ कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, खिचड़ी में इस्तेमाल होने वाली चीजें ग्रहों से जुड़ी होती हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाली काली उड़द की दाल का संबंध शनि देव से है। माना जाता है कि इस दिन उड़द दाल की खिचड़ी खाने और दान करने से ग्रहों के दोष दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
क्या-क्या चाहिए खिचड़ी बनाने के लिए?
मकर संक्रांति वाली खास खिचड़ी बनाने के लिए आपको इन चीजों की जरूरत होगी:
- नए चावल और उड़द की दाल
- सब्जियां (मटर, गोभी, आलू और टमाटर)
- मसाले (हल्दी, हींग, जीरा और गरम मसाला)
- तड़के के लिए देसी घी, हरी मिर्च और अदरक
बनाने का सबसे आसान तरीका
स्टेप 1: सबसे पहले चावल और उड़द दाल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसे 10-15 मिनट के लिए भिगोकर रख दें, इससे खिचड़ी नरम और टेस्टी बनती है।
स्टेप 2: अब प्रेशर कुकर में 2-3 चम्मच देसी घी गरम करें। घी गरम होने पर उसमें जीरा और हींग का तड़का लगाएं। अब इसमें बारीक कटी हरी मिर्च और अदरक डालकर हल्का सा भून लें।
स्टेप 3: अब इसमें मटर, गोभी और आलू जैसी सब्जियां डालकर थोड़ा चलाएं। इसके बाद हल्दी पाउडर, चावल और दाल डालकर सबको अच्छी तरह मिला लें।
स्टेप 4: स्वादानुसार नमक और जरूरत के हिसाब से पानी डालें। कुकर का ढक्कन बंद करें और 3 से 4 सीटी आने तक पकाएं। जब कुकर की गैस पूरी तरह निकल जाए, तब इसे खोलें।
ऐसे परोसें और करें दान
आपकी गरमा-गरम और खुशबूदार खिचड़ी तैयार है। इसे परोसते समय ऊपर से ढेर सारा देसी घी और हरा धनिया डालें। इसे आप दही, अचार या पापड़ के साथ सर्व कर सकते हैं।
धार्मिक रूप से इस दिन खिचड़ी का दान करना बहुत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि संक्रांति के दिन किया गया अन्नदान सीधे सूर्य देव और पितरों तक पहुँचता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

