द लोकतंत्र : आज की तीव्र गति से भागती दुनिया में प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर है। ऐसे परिदृश्य में, केवल किताबी ज्ञान बच्चों के करियर की सफलता की गारंटी नहीं है। वर्तमान दौर में पारंपरिक योग्यता के साथ-साथ सृजनात्मक (Creative) और आलोचनात्मक (Critical) सोच रखने वाले बच्चों की मांग हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है। चाहे वह विज्ञान, कला, खेल, या तकनीक हो—हर जगह क्रिएटिव सोच ही नए समाधान लाती है। यह बच्चे के अंदर आत्मविश्वास बढ़ाता है और उन्हें समस्या-समाधान (Problem-Solving) तथा बातचीत को संभालने की आदत विकसित करने में मदद करता है।
सवाल पूछना: रचनात्मकता की पहली नींव
बच्चों में जिज्ञासा प्राकृतिक रूप से मौजूद होती है, लेकिन अक्सर यह स्कूल और घर के माहौल में दब जाती है।
- पेरेंट्स की जिम्मेदारी: विशेषज्ञ मानते हैं कि सवाल पूछना ही क्रिएटिविटी की नींव है। अक्सर माता-पिता बच्चों को बार-बार सवाल पूछने के लिए टोकते हैं या उनके सवालों का जवाब नहीं देते। यह प्रवृत्ति बच्चों के सीखने की जिज्ञासा को कम करती है।
- समाधान: अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। यदि आपको जवाब नहीं पता है, तो उनके साथ उसका पता लगाएं। इससे बच्चे क्रिटिकल थिंकिंग सीखते हैं और नए समाधान ढूँढ़ने की उनकी क्षमता बढ़ती है।
डिजिटल समय को नियंत्रित करें
आजकल बच्चों का स्क्रीन टाइम चिंता का एक गंभीर विषय है। मोबाइल, टीवी और टैबलेट में अत्यधिक व्यस्तता उनके दिमाग को खुलकर सोचने का समय नहीं देती।
- समय सीमा निर्धारित करें: बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को सीमित करना अत्यंत आवश्यक है। रोज़ कम से कम 1 से 2 घंटे ‘स्क्रीन-फ्री टाइम’ तय करें।
- वैकल्पिक गतिविधियाँ: इस बचे हुए समय को पेंटिंग, डांस, म्यूज़िक, गार्डनिंग या आउटडोर गेम्स में लगाना चाहिए। इसके अलावा, स्कूल और सोसाइटी में होने वाली एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करने से भी बच्चे का सामाजिक दायरा बढ़ता है और क्रिएटिव लेवल में इजाफा होता है।
रचनात्मक उपकरण और सकारात्मक प्रोत्साहन
बच्चों को उनकी रचनात्मक ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए उपयुक्त टूल्स देना महत्वपूर्ण है।
- क्रिएटिव उपकरण: लेगो या बिल्डिंग ब्लॉक्स, मिट्टी, क्ले या प्ले-डो, पेंट, क्राफ्ट पेपर, पजल और बोर्ड गेम्स जैसे रचनात्मक उपकरण बच्चों को कुछ नया बनाने और समस्याओं को हल करने का मौका देते हैं।
- प्रेरणा और सराहना: नया सीखने में समय लगता है, इसलिए बच्चों को डांटने के बजाय प्रोत्साहित करें। उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों की सराहना करना आवश्यक है। यदि कुछ गलत हो जाए, तो उन्हें फिर से कोशिश करने के लिए प्रेरित करें।
- तुलना से बचें: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों की तुलना किसी और से न करें। उन्हें यह कहने के बजाय कि “इसे ऐसे कर सकते हो”, उनसे पूछें कि “तुम्हारे हिसाब से इसे कैसे किया जा सकता है?”—यह दृष्टिकोण उन्हें आत्मनिर्भरता और मौलिक सोच विकसित करने में मदद करता है।

