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Menstrual Health: पीरियड्स के असहनीय दर्द और थकान से राहत दिलाएंगे ये Superfoods, जानें पोषण का वैज्ञानिक महत्व

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द लोकतंत्र : मासिक धर्म या पीरियड्स प्रत्येक महिला के जीवन का एक अनिवार्य जैविक हिस्सा है, परंतु अक्सर यह समय अत्यधिक शारीरिक कष्ट, चिड़चिड़ापन और थकान लेकर आता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि पीरियड्स के दर्द का कोई तात्कालिक जादुई इलाज नहीं है, किंतु ‘न्यूट्रिशनल थेरेपी’ यानी सही खानपान के माध्यम से इन लक्षणों की तीव्रता को काफी हद तक न्यूनतम किया जा सकता है। संतुलित आहार न सिर्फ हार्मोनल असंतुलन को ठीक करता है, अपितु शरीर की खोई हुई ऊर्जा को पुनः संचित करने में भी सहायक होता है।

सूजन और हाइड्रेशन: जल तत्व का महत्व

मासिक धर्म के दौरान ब्लोटिंग (पेट फूलना) और सिरदर्द की मुख्य वजह पानी की कमी होती है।

  • प्राकृतिक स्रोत: शुद्ध जल के अलावा, खीरे और तरबूज जैसे फलों का सेवन अनिवार्य है। तरबूज न केवल शरीर को हाइड्रेट रखता है, बल्कि इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा मीठा खाने की तीव्र इच्छा (Sugar Cravings) को भी नियंत्रित करती है।

लौह तत्व और प्रोटीन: एनीमिया से बचाव

रक्तस्राव के कारण शरीर में आयरन का स्तर तीव्रता से गिरता है, जिससे चक्कर आना और अत्यधिक कमजोरी महसूस होती है।

  • हरित सब्जियां: पालक और केल जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन का उत्कृष्ट स्रोत हैं।
  • प्रोटीन की अनिवार्यता: चिकन और दालों का सेवन प्रोटीन की आपूर्ति करता है, जो मांसपेशियों की मरम्मत और स्थिर ऊर्जा स्तर बनाए रखने के लिए आवश्यक है। पर्याप्त प्रोटीन लेने से रक्त शर्करा स्तर भी स्थिर रहता है।

दर्द निवारक तत्व: मैग्नीशियम और ओमेगा-3

वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि कुछ विशिष्ट पोषक तत्व प्राकृतिक ‘पेनकिलर’ की भांति कार्य करते हैं:

  • डार्क चॉकलेट: इसमें प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम होता है, जो गर्भाशय की मांसपेशियों को शिथिल (Relax) करता है और पीएमएस (PMS) के लक्षणों को कम करता है।
  • फैटी फिश: सैल्मन और सार्डिन जैसी मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो शरीर में सूजन रोधी (Anti-inflammatory) प्रभाव डालता है, जिससे क्रैम्प्स में राहत मिलती है।
  • अदरक: अदरक की चाय मतली (Nausea) को कम करने और पाचन प्रक्रिया को सुगम बनाने में अचूक है।

विशेषज्ञ राय और भविष्य का प्रभाव

स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी दशकों में ‘हार्मोनल हेल्थ’ पर किए जा रहे शोधों में डाइट को प्राथमिक औषधि के रूप में देखा जाएगा। महिलाएं अब सिर्फ दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय स्वस्थ जीवनशैली को अपना रही हैं।

निष्कर्षतः, पीरियड्स के दौरान स्वयं की देखभाल विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यकता है। सही आहार का चुनाव न केवल उन पांच दिनों को आसान बनाता है, अपितु दीर्घकालिक प्रजनन स्वास्थ्य को भी सुनिश्चित करता है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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