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डिलीवरी के बाद दादी-नानी के नुस्खे या डॉक्टर की सलाह? जानें क्या है सही और क्या महज एक वहम

The loktnatra

द लोकतंत्र : बच्चे का जन्म एक महिला के लिए जितनी बड़ी खुशी है, उसका शरीर उतनी ही बड़ी उथल-पुथल से गुजरता है। डिलीवरी के बाद हड्डियों के टूटने जैसा दर्द सहने के साथ-साथ शरीर में हार्मोनल बदलाव, यूट्रस का सिकुड़ना और लोचिया (डिलीवरी के बाद की ब्लीडिंग) जैसी प्रक्रियाएं चलती हैं। ऐसे में पुरानी पीढ़ी, यानी हमारी दादी-नानी, सिर पर कपड़ा बांधने और नंगे पैर न चलने जैसी कई सलाहें देती हैं।

आज के दौर में कई महिलाओं को ये बातें पुरानी और दकियानूसी लगती हैं। लेकिन क्या वाकई ये बातें गलत हैं? इस बारे में हमने फेलिक्स हॉस्पिटल के एमडी डॉक्टर डीके गुप्ता से बात की, ताकि समझ सकें कि दादी-नानी की बातों में कितना दम है।

1. ठंड से बचाव: नंगे पैर चलना क्यों है गलत?

डॉक्टर डीके गुप्ता बताते हैं कि डिलीवरी के बाद शरीर की इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) काफी कम हो जाती है। दादी-नानी का यह कहना कि ‘नंगे पैर फर्श पर न चलें’, बिल्कुल सही है। शरीर को इस वक्त गर्माहट और आराम की सख्त जरूरत होती है। हालांकि, पानी को लेकर वे कहते हैं कि गुनगुना पानी पीना सेहतमंद है, लेकिन पानी बहुत ज्यादा गर्म नहीं होना चाहिए।

2. सिर पर कपड़ा बांधना: क्या यह जरूरी है?

अक्सर नई मांओं को हर समय सिर ढंककर रखने को कहा जाता है। डॉक्टर के अनुसार, इसमें कुछ हद तक सच्चाई है लेकिन सख्ती बेकार है। नहाने के बाद सिर ढंकने से आप सर्दी-जुकाम से बच सकते हैं। साथ ही, अगर आप बाहर जा रही हैं जहाँ ठंडी हवा चल रही है, तो सिर ढंकना अच्छा है। पर घर के अंदर हर वक्त कपड़ा बांधे रखने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

3. एसी और पंखा: क्या कमरे को बंद रखना चाहिए?

पुराने समय में हवा के डर से खिड़की-दरवाजे और पंखे बंद कर दिए जाते थे। डॉक्टर कहते हैं कि यह गलत है। मां और बच्चे को ताजी हवा की जरूरत होती है। बस यह ध्यान रखें कि कमरे का तापमान 27-28 डिग्री के आसपास रहे। इसके लिए आप हल्का पंखा या एसी चला सकते हैं, बस सीधी हवा शरीर पर नहीं लगनी चाहिए।

4. खान-पान: घी-मसालों का भारी भोजन

दादी-नानी अक्सर लोध, हरीरा और खूब सारे घी-मेवे वाली चीजें खिलाती हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि पोषण जरूरी है, लेकिन खाना सुपाच्य (आसानी से पचने वाला) होना चाहिए। बहुत ज्यादा तेल-घी और कैलोरी वाला खाना इनडाइजेशन (अपच) और कब्ज की समस्या पैदा कर सकता है। डाइट ऐसी हो जिसमें प्रोटीन और विटामिन भरपूर हों, लेकिन वह पेट पर भारी न पड़े।

डॉक्टर की सलाह

डिलीवरी के बाद की देखभाल के मामले में एक्सपर्ट्स का कहना है कि दादी-नानी के अनुभवों को पूरी तरह नकारना नहीं चाहिए, क्योंकि उनके पीछे कहीं न कहीं सुरक्षा का भाव होता है। हालांकि, किसी भी नियम को आंख बंद करके मानने के बजाय अपनी मेडिकल कंडीशन के हिसाब से डॉक्टर से चर्चा करना सबसे समझदारी भरा कदम है।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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