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Iranian Tea Secrets: ईरान के लोग चाय में क्यों नहीं डालते दूध? जानें वहां का अनोखा टी-कल्चर

The loktnatra

द लोकतंत्र : जब भी भारत में चाय की बात होती है, तो हमारे दिमाग में दूध, अदरक और इलायची वाली ‘कड़क मसाला चाय’ की तस्वीर आती है। हमारे यहाँ बिना दूध की चाय या तो फिटनेस के लिए पी जाती है या फिर तब, जब पेट खराब हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ईरान (Iran) एक ऐसा देश है, जहाँ चाय में दूध डालना लगभग ‘पाप’ माना जाता है?

ईरान अपनी वास्तुकला और मेहमान-नवाजी के साथ-साथ अपने खास ‘टी कल्चर’ के लिए भी मशहूर है। अगर आप कभी ईरान जाएं, तो वहां आपको हर नुक्कड़ पर लोग कड़क ब्लैक टी पीते मिलेंगे, लेकिन उसमें दूध का नामोनिशान नहीं होगा। आइए जानते हैं इसके पीछे की दिलचस्प वजहें।

क्यों नहीं डाला जाता चाय में दूध?

ईरानी लोगों का मानना है कि चाय अपने आप में एक कला है। वहां दूध न डालने की दो मुख्य वजहें हैं:

  • असली स्वाद और रंग: ईरानियों का मानना है कि दूध डालने से चाय का असली बोल्ड टेस्ट, उसकी प्राकृतिक खुशबू और गहरा लाल रंग दब जाता है। वे चाय को उसके ‘प्योर फॉर्म’ में पीना पसंद करते हैं ताकि चाय की पत्तियों का असली अहसास मिल सके।
  • मीठे के साथ तालमेल: ईरान में चाय के साथ नमकीन बिस्कुट या भुजिया नहीं, बल्कि मीठी चीजें जैसे खजूर, ‘नुक्ल’ (चीनी वाली मिठाई) या ‘बकलवा’ खाने का चलन है। ब्लैक टी इन मीठी चीजों के साथ बेहतरीन तालमेल बिठाती है, जबकि दूध वाली चाय के साथ इनका स्वाद उतना अच्छा नहीं लगता।

जाफरान चाय: खास मौकों की जान

ईरान में शादी-ब्याह या बड़े फंक्शन हों, तो वहां ‘जाफरान चाय’ (Saffron Tea) जरूर परोसी जाती है। इसे मूड ठीक करने वाली चाय माना जाता है।

  • कैसे बनती है: इसे बनाने के लिए केसर के धागों को कूटकर गर्म पानी में भिगोया जाता है। फिर सादी चाय पत्ती को पानी में उबालकर उसमें केसर का मिश्रण और गुलाब जल डाला जाता है। यह चाय न सिर्फ दिखने में खूबसूरत होती है, बल्कि इसकी खुशबू भी लाजवाब होती है।

फूलों वाली चाय: ‘गोल गवज़बान’

ईरान में एक और मशहूर चाय है जिसे ‘गोल गवज़बान’ (Borage Tea) कहा जाता है। यह एक खास तरह के बैंगनी फूल से बनती है। लोग अक्सर शाम के वक्त तनाव कम करने के लिए इसे पीते हैं। इसमें मिठास के लिए शहद और खटास के लिए नींबू की कुछ बूंदें डाली जाती हैं।

कैसे पीते हैं ईरानी लोग चाय?

ईरान में चाय पीने का तरीका भी अलग है। वहां कई लोग चाय में चीनी घोलने के बजाय चीनी का एक टुकड़ा (जिसे ‘कंड’ कहते हैं) अपने दांतों के बीच दबाते हैं और फिर कड़क गरम चाय का घूंट भरते हैं। इससे चाय की कड़वाहट और चीनी की मिठास का एक अनोखा बैलेंस बनता है।

तो अगली बार जब आप ब्लैक टी पिएं, तो उसे ईरानी स्टाइल में ट्राई करना न भूलें!

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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