द लोकतंत्र : देश के उत्तरी भागों, विशेषकर दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में पारा लगातार गिर रहा है। यह कड़ाके की ठंड जहाँ सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर रही है, वहीं नवजात शिशुओं के लिए यह प्राणघातक सिद्ध हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात शिशुओं का शरीर वयस्कों की भांति तापमान को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होता, जिसके कारण वे अत्यंत शीघ्र ‘हाइपोथर्मिया’ (शरीर का तापमान अत्यधिक कम होना) का शिकार हो सकते हैं। एम्स (AIIMS) दिल्ली के पीडियाट्रिक विभाग ने इस विषय पर विशेष सावधानी बरतने का परामर्श जारी किया है।
लक्षणों की पहचान: मौन संकेतों को समझना
नवजात शिशु अपनी पीड़ा व्यक्त करने में असमर्थ होते हैं, इसलिए अभिभावकों को उनके शारीरिक बदलावों के प्रति अत्यधिक सजग रहना चाहिए।
- शारीरिक संकेत: एम्स के डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, यदि शिशु के हाथ-पैर लगातार ठंडे रहते हैं या त्वचा का रंग पीला अथवा नीला पड़ने लगे, तो यह गंभीर ठंड का संकेत है।
- व्यवहारगत परिवर्तन: शिशु का अत्यधिक सुस्त होना, स्तनपान (Breastfeeding) में रुचि न दिखाना अथवा रोने में अस्वभाविक कमजोरी महसूस होना भी चिंताजनक है। इसके अलावा, सांस की गति का तेज होना श्वसन तंत्र पर ठंड के प्रभाव को दर्शाता है।
निवारक रणनीति: वैज्ञानिक देखभाल पद्धति
शिशु को ठंड से बचाने के लिए केवल कपड़ों की परतें महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि वातावरण का संतुलन भी अनिवार्य है।
- उपयुक्त पोशाक: शिशु को स्तरों (Layers) में कपड़े पहनाएं। सिर को टोपी से और पैरों को मोजों से ढककर रखना अनिवार्य है, क्योंकि शिशु के शरीर की अधिकांश गर्मी इन्हीं हिस्सों से निकलती है।
- स्तनपान का महत्व: मां का दूध शिशु को न केवल पोषण देता है, बल्कि उसकी आंतरिक गर्मी और इम्यूनिटी को भी बनाए रखता है।
- कमरे का वातावरण: कमरे में ठंडी हवा के प्रवेश को रोकें। यदि हीटर का प्रयोग कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि कमरे में नमी बनी रहे ताकि शिशु की त्वचा में रूखापन न आए।
विशेषज्ञ परामर्श एवं भविष्य की सतर्कता
- डॉ. भदानी ने स्पष्ट किया है कि शिशु को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर ले जाने से बचना चाहिए, क्योंकि ठंड के मौसम में वायरल संक्रमण तीव्रता से फैलता है। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि किसी भी लक्षण को सामान्य समझकर घरेलू उपचार में समय नष्ट न करें। आगामी दशकों में जलवायु परिवर्तन के कारण ठंड के चरम स्तर (Extreme Cold) को देखते हुए, नवजात शिशुओं के लिए नियमित पीडियाट्रिक चेकअप अनिवार्य होगा।
निष्कर्षतः, नवजात शिशु अत्यंत संवेदनशील होते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए सतर्कता ही एकमात्र विकल्प है। सही पोषण, उपयुक्त तापमान और समय पर चिकित्सीय परामर्श के माध्यम से शीत लहर के खतरों को न्यूनतम किया जा सकता है।

