द लोकतंत्र : सर्दियों का आगमन अपने साथ न केवल ठिठुरन, अपितु त्वचा से जुड़ी अनेक व्याधियां भी लेकर आता है। वायुमंडल में आर्द्रता (Humidty) की कमी और गर्म पानी का अत्यधिक प्रयोग त्वचा के प्राकृतिक तैल (Natural Oils) को नष्ट कर देता है, जिससे त्वचा रूखी, बेजान और खिंची-खिंची प्रतीत होने लगती है। ऐसे में नहाने के पश्चात तेल लगाने की पारंपरिक आदत पर अक्सर बहस होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मात्र एक आदत नहीं, बल्कि यदि सही ढंग से किया जाए, तो यह त्वचा के लिए एक अभेद सुरक्षा कवच सिद्ध हो सकता है।
वैज्ञानिक आधार: कैसे काम करता है तेल?
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. इशिता पंडित के अनुसार, त्वचा की नमी को बनाए रखने के लिए ‘हाइड्रेशन’ और ‘मॉइस्चराइजेशन’ के बीच के अंतर को समझना अनिवार्य है।
- नमी को लॉक करना: तेल स्वयं नमी प्रदान नहीं करता, बल्कि यह एक ‘ऑक्लूसिव’ (Occlusive) परत बनाता है। जब आप गीली त्वचा पर तेल लगाते हैं, तो यह त्वचा की सतह पर मौजूद पानी को भीतर ही रोक लेता है। यदि त्वचा पूरी तरह सूख जाए और फिर तेल लगाया जाए, तो यह उतना असरदार नहीं होता।
- गर्म पानी का दुष्प्रभाव: अत्यधिक गर्म पानी त्वचा के सुरक्षात्मक लिपिड बैरियर को पिघला देता है। ऐसे में नहाने के तुरंत बाद तेल लगाना उस क्षतिग्रस्त परत की मरम्मत में सहायक होता है।
स्नान की पद्धति और उपचार: ठंडा बनाम गर्म जल
त्वचा की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि स्नान के लिए किस तापमान के जल का चयन किया गया है।
- गर्म जल से स्नान: यह त्वचा को त्वरित शुष्क करता है। डॉ. इशिता सलाह देती हैं कि ऐसे व्यक्तियों को गीली त्वचा पर ही तेल लगाना चाहिए। बेहतर परिणामों के लिए तेल को किसी लोशन या मॉइस्चराइज़र में मिलाकर लगाना सर्वाधिक प्रभावशाली रहता है।
- ठंडे जल से स्नान: ठंडा पानी त्वचा के नेचुरल ऑयल्स को सुरक्षित रखता है। ऐसे लोग त्वचा को तौलिए से हल्का सा पोछने (Dab-dry) के बाद भी तेल लगा सकते हैं।
सर्वश्रेष्ठ विकल्प: नारियल और तिल के तेल का महत्व
- बाजार में उपलब्ध विभिन्न बॉडी ऑयल्स के बीच नारियल का तेल अपनी सूक्ष्म आणविक संरचना के कारण सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह त्वचा में गहराई तक समाता है और चिपचिपाहट कम पैदा करता है। आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में तिल का तेल और नारियल तेल का मिश्रण त्वचा को गर्माहट और पोषण दोनों प्रदान करता है।
निष्कर्षतः, नहाने के तुरंत बाद तेल लगाना सर्दियों में त्वचा की रक्षा का एक पुख्ता तरीका है। यह न केवल रूखेपन को रोकता है, बल्कि त्वचा की लोच (Elasticity) को भी बनाए रखता है। आगामी समय में बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के बीच, प्राकृतिक उपचारों का यह वैज्ञानिक अनुपालन त्वचा स्वास्थ्य के लिए निर्णायक होगा।

