द लोकतंत्र : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराने के साथ ही 500 वर्ष पुराना संकल्प पूरा हो गया, जिसे पीएम मोदी ने एक ‘युगांतकारी’ क्षण बताया। हालाँकि, इस सांस्कृतिक उत्कर्ष के बीच, स्थानीय राजनीति में एक विवादित स्वर उठा है। अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने उन्हें इस ध्वजारोहण कार्यक्रम में निमंत्रण न दिए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, और इसे ‘संकीर्ण सोच’ का परिणाम बताया है।
सांसद का सीधा आरोप: ‘दलित समाज’ से होने का कारण
अवधेश प्रसाद ने इस उपेक्षा को सीधे जातिगत भेदभाव से जोड़ा है।
- सोशल मीडिया पोस्ट: कार्यक्रम समाप्त होने के बाद, अवधेश प्रसाद ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराज़गी व्यक्त करते हुए एक पोस्ट किया। उन्होंने कहा, “रामलला के दरबार में धर्म ध्वजा स्थापना कार्यक्रम में मुझे न बुलाए जाने का कारण मेरा दलित समाज से होना है।”
- राम की मर्यादा: उन्होंने इस व्यवहार को ‘राम की मर्यादा नहीं’ बल्कि ‘किसी ओर की संकीर्ण सोच का परिचय’ बताते हुए कहा कि राम सबके हैं।
- लड़ाई का उद्देश्य: सांसद ने स्पष्ट किया कि उनकी यह लड़ाई किसी पद या निमंत्रण की नहीं, बल्कि ‘सम्मान, बराबरी और संविधान की मर्यादा’ की है।
निमंत्रण न मिलने पर पूर्व की घोषणा
सांसद अवधेश प्रसाद ने ध्वजारोहण से एक दिन पहले ही, यानी 24 नवंबर को ही इस बात की जानकारी सार्वजनिक कर दी थी कि उन्हें इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए न्योता नहीं मिला है।
- नंगे पांव जाने का संकल्प: उन्होंने यह भावुक घोषणा भी की थी कि यदि उन्हें न्योता मिला, तो वे ‘सारा काम धाम छोड़कर नंगे पैर ही वहाँ जाएँगे’।
- अपेक्षा और उपेक्षा: स्थानीय सांसद होने के नाते उन्हें कार्यक्रम में बुलाए जाने की स्वाभाविक अपेक्षा थी, लेकिन निमंत्रण न मिलने के बाद उनका यह बयान अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में बड़े पैमाने पर तूल पकड़ रहा है।
पीएम मोदी का ऐतिहासिक कार्यक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अयोध्या पहुँचे थे और उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार और ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच यह ध्वजारोहण अनुष्ठान संपन्न किया।
- उपस्थित गणमान्य: इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे प्रमुख व्यक्ति मौजूद थे।
- मंदिर निर्माण की पूर्णता: पीएम मोदी ने 5 अगस्त 2020 को मंदिर की नींव रखी थी और 22 जनवरी 2022 को उद्घाटन किया था। आज ध्वजारोहण के साथ ही मंदिर का निर्माण औपचारिक रूप से पूरा हो गया है, जिसे पीएम मोदी ने ‘सदियों के जख्म और दर्द भरने’ वाला पल बताया।
एक ओर जहाँ देश भर में राम मंदिर निर्माण की पूर्णता का उत्साह है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय दलित सांसद को निमंत्रण न दिए जाने के कारण समानता और संवैधानिक सम्मान का मुद्दा केंद्र में आ गया है, जिसने इस धार्मिक समारोह पर एक राजनीतिक सवालिया निशान लगा दिया है।

