द लोकतंत्र : राजस्थान की राजधानी जयपुर के निकटवर्ती चौमूं कस्बे में पिछले सप्ताह हुई सांप्रदायिक अशांति और पुलिस पर पथराव की घटना के बाद प्रशासन अत्यंत सख्त तेवर में नजर आ रहा है। आज 2 जनवरी 2026 को नगर परिषद और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने पठान कॉलोनी सहित हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में बुलडोजर की मदद से अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। यह कदम उन उपद्रवियों के विरुद्ध एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने कानून को अपने हाथ में लेने का दुस्साहस किया था। सुरक्षा के दृष्टिगत पूरे क्षेत्र को छावनी में परिवर्तित कर दिया गया है।
प्रशासनिक कार्यवाही: नोटिस की अवधि और ध्वस्तीकरण
हिंसा की जांच के बाद पुलिस ने चिह्नित किए गए 24 पत्थरबाजों के आवासों पर नोटिस चस्पा किए थे।
- विधिक प्रक्रिया: नगर परिषद ने 29 दिसंबर को 20 अवैध बूचड़खानों और 4 अवैध निर्माणों को लेकर तीन दिवसीय अल्टीमेटम जारी किया था। 31 दिसंबर को मियाद पूरी होने तक जब संबंधित पक्षों द्वारा कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, तो प्रशासन ने आज प्रातः काल से ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी।
- पुलिस का कड़ा घेरा: कार्यवाही के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए चार थानों की पुलिस और आरएसी (RAC) की टुकड़ियों को तैनात किया गया है।
हिंसा की पृष्ठभूमि: रेलिंग विवाद से पथराव तक
चौमूं हिंसा का मुख्य कारण एक स्थानीय मस्जिद के बाहर रेलिंग लगाने को लेकर उत्पन्न हुआ विवाद था।
- समझौते का उल्लंघन: प्रारंभिक वार्ता में समुदाय के प्रतिनिधियों और पुलिस के बीच पत्थर हटाने पर सहमति बनी थी। किंतु, पत्थर हटने के तुरंत पश्चात भीड़ ने अवैध रूप से रेलिंग लगाना प्रारंभ कर दिया।
- पुलिस पर हमला: जब सुरक्षाबलों ने अनाधिकृत निर्माण को रोका, तो भीड़ हिंसक हो गई और पथराव शुरू कर दिया। इस झड़प में 6 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए, जिन्हें चिकित्सालय में भर्ती कराना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को आंसू गैस के गोले छोड़ने और इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने जैसे कड़े कदम उठाने पड़े।
निष्कर्षतः, चौमूं की यह घटना दशार्ती है कि कानून का उल्लंघन और सार्वजनिक शांति भंग करने वालों के विरुद्ध राजस्थान प्रशासन शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपना रहा है। अवैध अतिक्रमण को हटाना न केवल नगरीय नियमों का पालन है, अपितु यह हिंसक तत्वों की आर्थिक और सामाजिक कमर तोड़ने की रणनीति का भी हिस्सा है। क्षेत्र में शांति बहाली के प्रयास जारी हैं।

