द लोकतंत्र/ लखनऊ : लखनऊ स्थित समाजसेवी संस्था कल्याणम करोति ने अपने संस्थापक सदस्य एवं उपाध्यक्ष डॉ. के. के. ठकराल को भारत सरकार द्वारा प्रदान किए गए प्रतिष्ठित पद्म श्री सम्मान के उपलक्ष्य में एक गरिमामय अभिनंदन समारोह आयोजित किया। मोती महल स्थित संस्था कार्यालय में हुए इस कार्यक्रम में आत्मीयता, गर्व और उल्लास का विशेष वातावरण देखने को मिला।
डॉ. ठकराल को वर्ष 2025–26 के लिए आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके दीर्घकालिक शोध, चिकित्सीय अनुभव और भारतीय चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार के प्रति समर्पण का प्रतीक है। संस्था के पदाधिकारियों ने इसे न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि, बल्कि प्रदेश और आयुर्वेद जगत के लिए भी ऐतिहासिक क्षण बताया।
शॉल और स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मान, गणमान्य जनों की रही उपस्थिति
समारोह में दीनबंधु नेत्रालय ट्रस्ट के अध्यक्ष भारत दीक्षित एवं कल्याणम करोति के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह ने डॉ. ठकराल को शॉल ओढ़ाकर तथा भगवान राम की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। संस्था के अन्य सदस्यों ने भी पुष्पगुच्छ और पटका अर्पित कर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया।
कार्यक्रम में श्री दीन बंधु नेत्र चिकित्सालय, अयोध्या के महाप्रबंधक डी. एन. मिश्र, उदय भान पाठक, दिल्ली से आए डॉ. डी. एस. शुक्ला, मनीष कपूर, राजेश अग्रवाल, सविता शुक्ला, अजय मिश्रा, संजय मिश्र और डॉ. राजेश तिवारी सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। संस्था के महामंत्री राष्ट्र गौरव शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. ठकराल की उपलब्धियों को प्रेरणास्रोत बताया।
आयुर्वेद के प्रति आजीवन समर्पण का जिक्र
अपने संबोधन में डॉ. ठकराल ने आयुर्वेद के विकास, शोध कार्यों, शल्य चिकित्सा अनुभव और प्रकाशित पुस्तकों के माध्यम से समाज को दिए गए योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा परंपरा केवल उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन शैली का आधार है।
उन्होंने युवा चिकित्सकों से अपील की कि वे आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्थापित करें। उनके विचारों ने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया। यह समारोह केवल सम्मान का आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और भारतीय चिकित्सा परंपरा के गौरव का उत्सव बन गया। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने इसे प्रेरणादायी और ऐतिहासिक क्षण बताया, जिसने आयुर्वेद के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया।

