द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : 14 साल की उम्र में जहां बच्चे अपने सपनों को बस आकार दे रहे होते हैं, वहीं बिहार के युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी ने वह मुकाम हासिल कर लिया है जो कई खिलाड़ी वर्षों की मेहनत के बाद पाते हैं। ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से सुर्खियों में आए वैभव अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच चुके हैं।
वीर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया, जो हर साल देशभर से चुने गए प्रतिभाशाली बच्चों को दिया जाता है। इस बार 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 20 बच्चों को यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड प्रदान किया गया, जिसमें वैभव सबसे चर्चित नाम रहे।
किसे मिलता है यह अवॉर्ड?
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 5 से 18 वर्ष आयु के उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने खेल, शिक्षा, कला-संस्कृति, नवाचार, सामाजिक सेवा और अब विज्ञान-तकनीक जैसे क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हों। पुरस्कार के साथ एक स्वर्ण पदक, प्रमाण पत्र और 1 लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है। इतना ही नहीं, इन बच्चों को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का अवसर भी मिलता है, जो उनके जीवन का सबसे गर्वपूर्ण क्षण होता है।
वैभव सूर्यवंशी ने बहुत कम समय में बड़े रिकॉर्ड दर्ज किए
वैभव सूर्यवंशी ने बहुत कम समय में बड़े रिकॉर्ड दर्ज किए हैं। आईपीएल में उन्होंने मात्र 35 गेंदों में शतक जड़कर क्रिकेट जगत को हैरान किया, वहीं विजय हजारे ट्रॉफी में 36 गेंदों में शतक लगाकर नया इतिहास रच दिया। अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ मैच में वे 84 गेंदों पर 190 रन बनाकर दोहरे शतक से सिर्फ 10 रन दूर रह गए। इतनी कम उम्र में यह प्रदर्शन उन्हें भारत के भविष्य के बड़े बल्लेबाजों की सूची में पहले ही शामिल कर चुका है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद वैभव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे, जिसे युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का संदेश माना जा रहा है कि काबिलियत और मेहनत को देश सर्वोच्च मंच पर सम्मान देता है। वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को गुरु गोविंद सिंह जी के चार साहिबजादों की शहादत की स्मृति में मनाया जाता है, और इस अवसर पर वैभव का सम्मान होना उनके क्रिकेट सफर में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ देता है।
वैभव सूर्यवंशी आज देश के उन गिने-चुने बाल खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ है। उनके खेल ने दिखा दिया है कि उम्दा प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। आने वाले वर्षों में क्रिकेट जगत उनकी बल्लेबाजी का और बड़ा रूप देख सकता है और संभव है कि वैभव का अगला कदम टीम इंडिया की जर्सी हो।

