द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : बुधवार, 24 सितंबर 2025 को लद्दाख के लेह में Gen-Z छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छात्रों ने सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया। वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और उसे छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन इतना उग्र था कि छात्रों ने CRPF की गाड़ियों को आग लगा दी और पुलिस के साथ झड़प भी हुई।
सोनम वांगचुक लद्दाख में कई महीनों से इस मुद्दे पर अनशन पर बैठे थे। उन्होंने पहले नई दिल्ली तक लंबा मार्च किया और केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि लद्दाख को अलग राज्य का दर्जा मिले। हालांकि, केंद्र ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उनके समर्थन में लेह के Gen-Z छात्रों ने बुधवार को सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश दिखाया।
लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग पुरानी
इस विरोध प्रदर्शन का ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ भी है। 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया गया। जम्मू-कश्मीर को एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, जबकि लेह और कारगिल को मिलाकर लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया। लेकिन लद्दाख के लोगों और कार्यकर्ताओं की मान्यता है कि इस प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए, ताकि स्थानीय प्रशासन और विकास योजनाओं में अधिक स्वायत्तता और संसाधन मिल सकें।
विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे सोनम वांगचुक की एपेक्स बॉडी ने लगातार केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल किया जाए। वांगचुक का कहना है कि इस क्षेत्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को देखते हुए इसे राज्य का दर्जा मिलना जरूरी है। भूख हड़ताल और लंबी पदयात्रा के बाद अब Gen-Z छात्रों के सक्रिय समर्थन से यह आंदोलन और तेज हो गया है।
नेपाल में हाल ही में Gen-Z ने सत्ता परिवर्तन और तख्ता पलट किया था
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह प्रदर्शन भारत में युवा सक्रियता (Gen-Z activism) का नया संकेत है। नेपाल में हाल ही में Gen-Z ने सत्ता परिवर्तन और तख्ता पलट किया था। भारत में भी राहुल गांधी ने पिछले हफ़्ते युवा वर्ग को सक्रिय होकर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों के प्रति सजग रहने का अहवाहन किया था। लद्दाख से शुरू हुआ यह आंदोलन इसी युवा राजनीतिक सक्रियता का उदाहरण माना जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह आंदोलन लगातार जारी रहा, तो यह लद्दाख और केंद्र सरकार के बीच नए संवाद और नीतिगत बदलाव को मजबूर कर सकता है। छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं की यह ऊर्जा अब केवल लद्दाख तक सीमित नहीं रह सकती। आगामी महीनों में भारत के अन्य हिस्सों में भी युवा वर्ग के सक्रिय होने की संभावना है, खासकर उन मुद्दों पर जहां सामाजिक न्याय, राज्य अधिकार और स्थानीय स्वायत्तता का सवाल उठता है।
लद्दाख में हुए इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि Gen-Z अब सिर्फ आलोचक नहीं, बल्कि निर्णायक और संगठित आंदोलनकारी बनते जा रहे हैं। केंद्र सरकार के लिए यह समय है कि वे युवा आवाज़ को गंभीरता से सुनें और लद्दाख के लोगों की संवैधानिक और सामाजिक मांगों पर ठोस कदम उठाएँ।

