द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के सफल समापन के बाद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इसे भारत की वैश्विक क्षमता का प्रमाण बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक समिट में पूरी दुनिया ने भारत की तकनीकी सोच और युवाओं की क्षमता की खुले दिल से प्रशंसा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के युवाओं की टेक्नोलॉजी के प्रति सोच मानवता के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी।
16 से 20 फरवरी तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय समिट का समापन ‘नई दिल्ली घोषणा’ (New Delhi Declaration on AI Impact) को अपनाने के साथ हुआ। इस घोषणा का समर्थन 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने किया है, जो वैश्विक स्तर पर एआई के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग के प्रति व्यापक सहमति को दर्शाता है।
‘सर्वजन हिताय’ के सिद्धांत पर आधारित 7 चक्र, वैश्विक सहयोग पर जोर
‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर आधारित इस घोषणा में एआई के लाभों को समान रूप से मानवता तक पहुंचाने की बात कही गई है। इसमें राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करते हुए बहुपक्षीय सहयोग और बहु-हितधारक भागीदारी को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है।
घोषणा को सात प्रमुख स्तंभों या ‘चक्रों’ में संरचित किया गया है। इनमें एआई संसाधनों का लोकतांत्रिक प्रसार, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा, सुरक्षित और भरोसेमंद एआई सिस्टम, विज्ञान में एआई का विस्तार, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए पहुंच बढ़ाना, मानव पूंजी का विकास और ऊर्जा-कुशल तथा नवोन्मेषी एआई प्रणालियों को प्रोत्साहन शामिल हैं।
समिट के दौरान कई वैश्विक और स्वैच्छिक पहल की भी घोषणा की गई, जिनमें ‘चार्टर फॉर द डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन ऑफ एआई’, ‘ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉमन्स’ और ‘ट्रस्टेड एआई कॉमन्स’ प्रमुख हैं। इन पहलों का उद्देश्य किफायती एआई संसाधनों की पहुंच बढ़ाना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और सुरक्षित एआई ढांचे को मजबूत बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समिट भारत को वैश्विक एआई नीति निर्धारण में अग्रणी भूमिका दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत न केवल तकनीकी विकास में आगे बढ़ रहा है, बल्कि एआई को मानवता के कल्याण के लिए उपयोग करने के वैश्विक प्रयासों का नेतृत्व भी कर रहा है।

