द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : अमेरिका द्वारा एच-1 बी वीज़ा की फीस में भारी बढ़ोतरी किए जाने के बाद भारतीय आईटी कंपनियों और प्रोफेशनल्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारत के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। ऐसे समय में जर्मनी की ओर से आई एक राहत भरी खबर भारतीय युवाओं और कामकाजी पेशेवरों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है।
भारतीय, जर्मनों से ज्यादा कमाते हैं
भारत में जर्मन राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन ने मंगलवार (23 सितंबर 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश जारी किया। इस संदेश में उन्होंने भारतीयों को जर्मनी के लिए “खास और भरोसेमंद साझेदार” बताते हुए कहा कि जर्मनी में सबसे ज़्यादा कमाई करने वालों में भारतीय शामिल हैं। राजदूत ने गर्व से कहा कि औसतन भारतीय नागरिक जर्मनी में जर्मन लोगों से भी अधिक कमाई करते हैं, जो इस बात का सबूत है कि भारतीय प्रोफेशनल्स यहां अधिक मेहनत, लगन और समर्पण के साथ काम करते हैं।
एकरमैन ने कहा कि भारतीयों की मेहनत और दक्षता न सिर्फ़ जर्मन अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है बल्कि वे समाज में भी बड़ा योगदान करते हैं। यही कारण है कि जर्मनी हमेशा सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को सर्वश्रेष्ठ अवसर देने में विश्वास रखता है। उन्होंने मज़ाकिया लहजे में अपनी प्रवासन नीति की तुलना जर्मन कारों से करते हुए कहा कि यह “भरोसेमंद, मॉर्डन और उम्मीदों पर खरी उतरने वाली” है।
अमेरिका का नाम लिए बिना उन्होंने दो टूक कहा कि जर्मनी अचानक नियम नहीं बदलता और यहां की नीतियां स्थिर और स्पष्ट हैं। उनका यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी वीज़ा नीति में हालिया बदलावों पर कटाक्ष माना जा रहा है, जिसने हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स को असमंजस में डाल दिया है।
आधिकारिक वेबसाइट साझा कर बुलाया
राजदूत ने भारतीय युवाओं और उच्च-कुशल कामगारों से सीधा आह्वान किया कि वे जर्मनी आएं और यहां अपना करियर बनाएं। उन्होंने आईटी, प्रबंधन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में मौजूद अवसरों का ज़िक्र करते हुए कहा कि जर्मनी भारतीयों के लिए सबसे उपयुक्त गंतव्य है। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवार जर्मनी के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया और अवसरों की जानकारी हासिल कर सकते हैं। लिंक: http://linktr.ee/germanyinindia
अमेरिका की अप्रत्याशित नीतियों से परेशान भारतीय आईटी सेक्टर के लिए यह संदेश बेहद अहम है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय प्रोफेशनल्स की नई मंज़िल अमेरिका के बजाय जर्मनी बन सकती है। यह न सिर्फ़ यूरोप में भारत-जर्मनी संबंधों को और मजबूत करेगा, बल्कि भारतीय युवाओं के लिए नए करियर अवसर भी खोलेगा।

