द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO देशों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि कई सहयोगी देश अमेरिका के सैन्य अभियान में शामिल होने से पीछे हट रहे हैं, जबकि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ सहमत हैं।
ट्रंप ने NATO को ‘वन-वे स्ट्रीट’ बताते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका वर्षों से अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा पर भारी खर्च करता है, लेकिन जब जरूरत पड़ती है तो वही देश साथ देने से पीछे हट जाते हैं।
उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका को अब किसी भी देश की मदद की आवश्यकता नहीं है और वह अपने दम पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम है। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
इस पूरे विवाद के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम मार्ग माना जाता है। मौजूदा संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी असर पड़ा है। ट्रंप ने पहले अपने सहयोगी देशों से इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए नौसेना भेजने की अपील की थी, लेकिन कई देशों ने इसमें सक्रिय भागीदारी से दूरी बना ली। इसके बाद ट्रंप ने खुलकर नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है, जिसमें उसकी नौसेना, वायुसेना और रक्षा तंत्र शामिल हैं। इस संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद हुई थी, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके चलते वैश्विक स्तर पर आर्थिक और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच बढ़ती दूरी भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बना सकती है।

