द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : बिहार चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करता दिख रहा है। शुरुआती रुझानों में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की भारी बढ़त के बाद प्रदेश और दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालयों में जश्न का माहौल बन गया है। पटाखे फूट रहे हैं, ढोल-नगाड़ों की आवाज गूंज रही है और कार्यकर्ता मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 6 बजे बीजेपी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। एनडीए की बढ़त में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पीएम मोदी की जोड़ी को निर्णायक माना जा रहा है।
पच्चीस से तीस फिर नीतीश
पिछले दो दशकों से बिहार में नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सुशासन और स्थिर प्रशासन का प्रतीक माना जाता है। इस चुनाव को उनके लिए एक महत्वपूर्ण अग्निपरीक्षा बताया जा रहा था, लेकिन शुरुआती रुझानों ने साबित किया कि जनता ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।
पीएम मोदी और नीतीश कुमार का संयुक्त प्रचार अभियान विकास, बुनियादी ढांचे, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा। दोनों नेताओं ने जिस सामंजस्य के साथ चुनाव प्रचार किया, उसने एनडीए को मजबूत बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अब तक मिले रुझानों के मुताबिक एनडीए कुल 200 सीटों पर आगे चल रही है। इनमें बीजेपी 95, जेडीयू 85, एलजेपी 20, एचएएम 3 और आरएलएम 4 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। दूसरी ओर, महागठबंधन में आरजेडी 25, कांग्रेस 2, CPI(ML) 1 और CPI-M सिर्फ 1 सीट पर आगे हैं। इसके अलावा बीएसपी 1 और AIMIM 5 सीटों पर बढ़त हासिल किए हुए है। ये आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि बिहार की जनता ने इस बार भी एनडीए पर भरोसा किया है।
एनडीए का प्रदर्शन बेहद मजबूत, शांति से हुआ मतदान
चुनाव के दौरान राज्य में शांति बनी रही और कहीं भी रिपोलिंग की जरूरत नहीं पड़ी। यह बिहार के राजनीतिक इतिहास में बड़ा परिवर्तन है, क्योंकि 1985, 1990 और 1995 के चुनाव हिंसा, बूथ लूट और पुनर्मतदान की घटनाओं के लिए बदनाम रहे हैं। एनडीए नेताओं ने इसे राज्य में सुधरी कानून-व्यवस्था और सुशासन की नीतियों का परिणाम बताया है।
बिहार की लगभग 89% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इसलिए ग्रामीण वोटरों का समर्थन किसी भी दल की जीत का आधार बनता है। इस चुनाव में ग्रामीण इलाकों में एनडीए का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा। नीतीश सरकार की सड़कों, बिजली, पानी और सामाजिक योजनाओं ने ग्रामीण मतदाताओं में उनकी पकड़ मजबूत की, जबकि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता ने शहरी और युवा वोट बैंक को भी एनडीए की ओर मोड़ा।
नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा भी इस परिणाम में अहम भूमिका निभाती है। 1970 के दशक में जेपी आंदोलन से राजनीति शुरू करने वाले नीतीश ने चार दशकों में बिहार को स्थिरता, विकास और सामाजिक संतुलन की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछड़े वर्गों और गरीब परिवारों को सशक्त बनाने वाली योजनाओं ने उनके नेतृत्व में जनता का भरोसा और गहरा किया है।

