द लोकतंत्र/ भोपाल : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़वानी में भगोरिया महोत्सव में भाग लिया। इसे प्रकृति और जनजातीय संस्कृति का उत्सव बताते हुए 27,500 करोड़ रुपये के कृषि व सिंचाई परियोजनाओं की घोषणा की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav सोमवार को बड़वानी जिले में आयोजित पारंपरिक ‘भगोरिया महोत्सव’ में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भगोरिया केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य में मनाया जाने वाला आनंद का उत्सव है। जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इसे राज्योत्सव का दर्जा दिया है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि निमाड़ क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक समृद्धि, उत्सवधर्मिता और जीवंत लोकजीवन के लिए प्रसिद्ध है। सदियों से यहां ऋतु परिवर्तन के साथ पर्व मनाने की परंपरा रही है, जिसने समाज में सामूहिकता और उल्लास को जीवित रखा है।
मेले में मांदल की थाप, पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों के लोकनृत्य और गुलाल की रंगत ने पूरे वातावरण को उत्साह से भर दिया। मुख्यमंत्री स्वयं जनजातीय कलाकारों के साथ मांदल की ताल पर थिरके और उनकी परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति की अपनी अलग पहचान और गरिमा है, जिसे सहेजना राज्य की जिम्मेदारी है।
कृषि कैबिनेट और 27,500 करोड़ के विकास निर्णय
भगोरिया के अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के तहत पहली कृषि कैबिनेट आयोजित करने की जानकारी दी, जिसमें 27,500 करोड़ रुपये के विकासात्मक निर्णय लिए गए। उन्होंने बताया कि बड़वानी जिले में उद्यानिकी फसलों का व्यापक उत्पादन होता है। इसे बढ़ावा देने के लिए कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और आधुनिक सब्जी मंडी स्थापित की जाएगी।
जनजातीय बहुल क्षेत्रों में पानसेमल और वरला माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं से हजारों हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी और बड़ी संख्या में आदिवासी किसानों को सीधा लाभ होगा।
खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाने के लिए 25 किसानों को अन्य राज्यों में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। साथ ही 50 एकड़ क्षेत्र में मॉडल बीज उत्पादन केंद्र स्थापित करने की योजना है, जिससे गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
जनजातीय संस्कृति का जीवंत उत्सव
भगोरिया महोत्सव होली से सात दिन पूर्व शुरू होकर होलिका दहन तक चलता है। यह पर्व मुख्य रूप से Barwani, Jhabua, Alirajpur, Dhar और Khargone जिलों में मनाया जाता है। भील, भिलाला और बरेला जनजातीय समुदायों के बीच यह विशेष महत्व रखता है।
यह महोत्सव अपने पारंपरिक हाट बाजार, लोकसंगीत, नृत्य और जीवनसाथी चुनने की प्राचीन परंपरा के लिए जाना जाता है। भगोरिया जनजातीय जीवन की ऊर्जा, उत्साह और सांस्कृतिक आत्मगौरव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने इस पारंपरिक मेले को और अधिक गरिमा और उत्साह प्रदान किया, साथ ही विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के संतुलन का संदेश भी दिया।

