द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के सीजफायर के बावजूद जमीनी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। संघर्ष विराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद फिर से हमलों और धमाकों की खबरें सामने आने लगीं, जिससे शांति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार सुबह ईरान की एक ऑयल रिफाइनरी पर हमले की सूचना मिली, जबकि रात के समय दक्षिण-पश्चिमी शहर एंडिमेश्क (Andimeshk) और उत्तरी शहर बाबोल (Babol) में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इन घटनाओं से स्थानीय लोगों में भय का माहौल बन गया है।
हालांकि इन धमाकों के पीछे की वजह को लेकर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इसे जारी तनाव और सैन्य गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सीजफायर उल्लंघन के आरोप और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव
इसी बीच क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता नजर आ रहा है। इजरायल द्वारा लेबनान पर लगातार हमलों से नाराज ईरान ने सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाया है। इसके जवाब में ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में एक तेल टैंकर को रोक दिया, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कदम जवाबी कार्रवाई के तहत उठाया गया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि लेबनान पर हमले जारी रहे तो ईरान सीजफायर को तोड़ सकता है। इससे पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
कूटनीतिक प्रयास तेज, लेकिन हालात नाजुक
तनावपूर्ण स्थिति के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सभी पक्षों से संयम बरतने और सीजफायर का सम्मान करने की अपील की है। वहीं चीन ने भी शांति बहाली के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करेगा।
दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान अब कुछ मामलों में मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में परमाणु गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और संवेदनशील स्थलों पर सैटेलाइट से नजर रखी जा रही है।
हालांकि इन बयानों के बावजूद जमीनी स्तर पर जारी हमले, आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य गतिविधियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि मिडिल ईस्ट की स्थिति अभी बेहद नाजुक बनी हुई है। सीजफायर के बावजूद यदि हालात नहीं सुधरे, तो यह क्षेत्र एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।

