द लोकतंत्र/ पटना : पटना के सदाकत आश्रम में आज़ादी के बाद पहली बार आयोजित कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की विस्तारित बैठक ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आगामी विधानसभा चुनाव से दो महीने पहले बुलाई गई इस बैठक ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस बार बिहार को लेकर ज्यादा संजीदा है और वह पूरी ताकत झोंकने के मूड में है। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के तमाम राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय नेता इस बैठक में मौजूद रहे।
बिहार को लेकर कांग्रेस का बढ़ा फोकस
कांग्रेस लंबे समय से बिहार की राजनीति में हाशिए पर रही है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। पार्टी को लगता है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। “डबल इंजन सरकार” के वादों के बावजूद राज्य को कोई विशेष पैकेज नहीं मिला और बिहार की अर्थव्यवस्था लगातार पिछड़ती जा रही है। यही वजह है कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले अपनी सक्रियता को बढ़ाया है और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
बैठक को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि भारत आज अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियाँ जिम्मेदार हैं। खरगे ने कहा, “मोदी जिन दोस्तों का नाम लेकर गर्व करते हैं, वही आज भारत को संकट में डाल रहे हैं।” उन्होंने वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
लोकतंत्र और संविधान की रक्षा पर जोर
खरगे ने बिहार की ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए कहा कि यह राज्य लोकतंत्र और संविधान की जननी है। ठीक 85 साल पहले रामगढ़ में कांग्रेस सेशन में संविधान सभा का प्रस्ताव आया था और आज वही बिहार लोकतंत्र की रक्षा के लिए कांग्रेस के संघर्ष का केंद्र बन रहा है। उन्होंने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी को गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों की चोरी करार दिया।
खरगे ने मोदी सरकार पर बेरोजगारी और आर्थिक संकट से देश को जूझने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2 करोड़ नौकरियों का वादा अधूरा रहा और आज युवा रोजगार के बिना भटक रहे हैं। नोटबंदी और गलत जीएसटी ने अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार दिया। उन्होंने व्यंग्य किया कि प्रधानमंत्री अब चाहते हैं कि लोग ज्यादा खर्च करें, जबकि पिछले 10 सालों में आमदनी नहीं बढ़ी और सिर्फ महंगाई बढ़ी है।
चीन नीति पर भी साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का “स्वदेशी मंत्र” आज सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गया है, जबकि हकीकत यह है कि चीन से आयात पिछले 5 वर्षों में दोगुना हो गया है। यह मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता को उजागर करता है।
बिहार चुनाव के लिए कांग्रेस की तैयारी
बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने साफ संकेत दिया कि आने वाले चुनाव में पार्टी पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरेगी। ‘वोटर अधिकार यात्रा’ जैसे अभियानों से पार्टी ने आम जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है। राहुल गांधी की मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया है। पटना की सड़कों पर गगनभेदी नारों और कार्यकर्ताओं के उत्साह ने यह जता दिया कि कांग्रेस अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका में दिखना चाहती है।
दरअसल, कांग्रेस की यह बैठक सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि चुनावी शंखनाद के रूप में देखी जा रही है। अगले दो महीनों में पार्टी अपनी रणनीति को तेज करेगी और एनडीए सरकार की नाकामियों को मुद्दा बनाकर जनता के बीच जाएगी। महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों के साथ-साथ लोकतंत्र बचाने का नारा कांग्रेस के चुनावी एजेंडे का मुख्य हिस्सा होगा।

