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कांग्रेस नेता शशि थरूर बोले- प्रधानमंत्री मोदी संविधान को पवित्र मानते हैं, बयान से बढ़ी सियासी हलचल

Congress leader Shashi Tharoor said that Prime Minister Modi considers the Constitution sacred, a statement that has stirred political controversy.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने पार्टी से नाराजगी की चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। शनिवार, 24 जनवरी 2026 को केरल के कोझिकोड में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल (KLF) में बोलते हुए थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारतीय संविधान को पवित्र ग्रंथ की तरह मानते हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में अमेरिकी कांग्रेस में दिए गए पीएम मोदी के ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उस मंच से प्रधानमंत्री ने संविधान को अपनी ‘पवित्र पुस्तक’ बताया था।

संविधान ने हर दौर में खुद को साबित किया: थरूर

अपने संबोधन में शशि थरूर ने भारतीय संविधान की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि यह दस्तावेज समय की हर कसौटी पर खरा उतरा है। उन्होंने कहा कि संविधान ने वह दौर भी देखा है, जब देश में ऐसी राजनीतिक ताकतें सत्ता में आईं, जिनके वैचारिक पूर्वजों जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कभी इसके प्रति असहमति जताई थी। इसके बावजूद संविधान न केवल कायम रहा, बल्कि लोकतंत्र की रीढ़ बना रहा।

थरूर ने याद दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद एक समय यह आशंका जताई जा रही थी कि संविधान को कमजोर या खत्म किया जा सकता है। उन्होंने उस दौर की चर्चाओं का जिक्र किया, जब आरएसएस से जुड़े विचारक के. एन. गोविंदाचार्य द्वारा नए संविधान का मसौदा तैयार किए जाने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, थरूर के अनुसार, इन तमाम अटकलों के बावजूद भारतीय संविधान की मूल आत्मा अक्षुण्ण रही।

ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार के कदम से सहमति

अपने राजनीतिक रुख पर बात करते हुए कांग्रेस सांसद ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी खुलकर विचार रखे। थरूर ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद उन्होंने एक कॉलम में स्पष्ट लिखा था कि इस तरह की घटना को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने माना कि बाद में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने वही कदम उठाया, जिसकी उन्होंने सार्वजनिक रूप से सिफारिश की थी। थरूर ने साफ किया कि इस रुख पर उन्हें किसी तरह का पछतावा नहीं है।

कांग्रेस के भीतर मतभेद, लेकिन सार्वजनिक मंच पर नहीं

पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के भीतर कुछ मुद्दे जरूर हैं, जिन्हें वह पार्टी नेतृत्व के साथ उठाएंगे, लेकिन ऐसे विषयों पर सार्वजनिक मंचों पर चर्चा करना उचित नहीं है। न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने संसद में कभी पार्टी लाइन का उल्लंघन नहीं किया और न ही भविष्य में ऐसा करने का इरादा है।

राजनीतिक संकेत और बढ़ती चर्चाएं

थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस के भीतर उनके भविष्य और भूमिका को लेकर अटकलें तेज हैं। प्रधानमंत्री मोदी और संविधान को लेकर दिए गए उनके सकारात्मक संदर्भ को राजनीतिक हलकों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कुछ इसे थरूर की वैचारिक स्वतंत्रता के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे कांग्रेस नेतृत्व के लिए एक असहज संकेत मान रहे हैं।

हालांकि, थरूर ने अपने वक्तव्य से यह संदेश जरूर दिया है कि लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय हित जैसे मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर बात की जानी चाहिए चाहे सत्ता में कोई भी हो।

Team The Loktantra

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