द लोकतंत्र : देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट परिसर में बुधवार को संविधान दिवस के अवसर पर बार एसोसिएशन द्वारा एक गरिमापूर्ण समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायिक प्रणाली में बार (वकीलों) के अहम योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब कोर्ट को संविधान का पहरेदार माना जाता है, तो बार के सदस्य मशाल उठाने वाले (Torchbearers) होते हैं।
बार की गहरी जिम्मेदारी
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने बार के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी कानून की संवैधानिकता पर फैसला सुनाते समय, बार ही कोर्ट के सामने ऐसी बातें लाता है, जिससे न्यायाधीश गहनता से समझ सकें और सही निर्णय ले सकें। उन्होंने बार को और भी गहरी जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया।
- सॉलिसिटर जनरल का मत: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संविधान निर्माण प्रक्रिया को याद करते हुए बताया कि संविधान पर 165 दिनों से अधिक समय तक चर्चा और बहस हुई थी। उन्होंने संविधान सभा को पूरे भारत का प्रतिनिधि बताया, जिसने अन्य देशों के संविधानों की सर्वोत्तम बातों को भारतीय वातावरण के अनुरूप ढाला।
न्यायपालिका की हस्तक्षेपकारी भूमिका
तुषार मेहता ने भारतीय शासन प्रणाली की प्रमुख विशेषता—शक्तियों के पृथक्करण को स्पष्ट किया।
- संतुलन का सिद्धांत: उन्होंने कहा कि भारत में किसी भी अंग (कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका) का दूसरे पर वर्चस्व नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जब भी कार्यपालिका और विधायिका ने संवैधानिक नैतिकता की सीमाओं को पार किया है, तो न्यायपालिका ने हस्तक्षेप किया है।
- आम आदमी का योगदान: मेहता ने सड़कों पर उतरे आम आदमी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिसने यह सुनिश्चित किया है कि संविधान मार्गदर्शक प्रकाश बना रहे।
सरकार की उपलब्धियां और भविष्य का लक्ष्य
इस कार्यक्रम में कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल भी उपस्थित थे, जिन्होंने सरकार के प्रयासों और संविधान के महत्व पर बात की।
- सामाजिक असमानता: कानून मंत्री ने कहा कि डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने जिन आर्थिक और सामाजिक असमानताओं की बात की थी, उसे अब नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार कम करने में लगी हुई है।
- आपातकाल का जिक्र: उन्होंने कहा कि आपातकाल (Emergency) के दौर में भी संविधान ने हमें दिशा दिखाई और देश झुका नहीं।
- विकसित भारत 2047: मेघवाल ने कहा कि भारत आज दुनिया में चौथे नंबर की अर्थव्यवस्था बन गया है और 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य लेकर सरकार चल रही है। उन्होंने इंडस्ट्री 4.0 और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आगामी चुनौतियों पर विचार करने की आवश्यकता भी व्यक्त की।
इस महत्वपूर्ण समारोह में मॉरिशस, केन्या, नेपाल, श्रीलंका, मलेशिया और भूटान के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के जज भी शामिल हुए, जो भारत के संविधान के वैश्विक महत्व को दर्शाता है।

