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व्हाइट कॉलर आतंकवाद पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की चेतावनी: कहा- शिक्षा केवल डिग्री नहीं, संस्कार और चरित्र भी जरूरी

Defence Minister Rajnath Singh's warning on white-collar terrorism: He said education is not just about degrees, but also about values ​​and character.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर और आत्ममंथन कराने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री और तकनीकी ज्ञान देने वाली शिक्षा प्रणाली को सफल नहीं कहा जा सकता, जब तक उसमें अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य और चरित्र निर्माण शामिल न हो।

राजनाथ सिंह ने ‘व्हाइट कॉलर टेररिज्म’ जैसे खतरनाक चलन की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज यह बेहद चिंताजनक है कि उच्च शिक्षा प्राप्त लोग, यहां तक कि डॉक्टर जैसे पेशे से जुड़े लोग भी आतंकवादी और आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस तरह की शिक्षा और संस्कार अगली पीढ़ी को दे रहे हैं। राजनाथ सिंह यह बात उदयपुर में आयोजित भूपाल नोबल विश्वविद्यालय के 104वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कह रहे थे।

रेड फोर्ट आतंकी हमले का जिक्र, शिक्षित अपराधियों पर सवाल

अपने भाषण में उन्होंने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए आत्मघाती कार बम हमले का जिक्र किया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। 10 नवंबर 2025 को हुए इस आतंकी हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।

जांच में सामने आया कि इस हमले को अंजाम देने वाला आत्मघाती हमलावर खुद एक डॉक्टर था, जिसका नाम डॉ. उमर उन नबी बताया गया। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बाद में कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया, जिनमें तीन और डॉक्टर क्रमशः डॉ. मुजम्मिल शकील गनई, डॉ. आदिल अहमद और डॉ. शाहीन सईद शामिल थे। इन तथ्यों का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह बेहद खतरनाक संकेत है कि समाज के पढ़े-लिखे और जिम्मेदार माने जाने वाले वर्ग भी राष्ट्र और समाज के खिलाफ हिंसक गतिविधियों में लिप्त हो रहे हैं।

शिक्षा का उद्देश्य केवल करियर नहीं

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी शिक्षा प्रणाली, जो ज्ञान के साथ-साथ विनम्रता, नैतिकता, मानवीय संवेदना और चरित्र का विकास नहीं करती, उसे सफल नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि आज हम ऐसी शिक्षा देख रहे हैं, जो लोगों को पेशेवर रूप से तो सक्षम बना रही है, लेकिन नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति उतनी सजग नहीं कर पा रही। यही वजह है कि “व्हाइट कॉलर टेररिज्म” जैसे नए और खतरनाक ट्रेंड सामने आ रहे हैं, जहां पढ़े-लिखे लोग अपनी बुद्धि और ज्ञान का इस्तेमाल समाज और देश को नुकसान पहुंचाने के लिए कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी, पैसा या सामाजिक प्रतिष्ठा पाना नहीं होना चाहिए। शिक्षा का असली मकसद ऐसा इंसान तैयार करना होना चाहिए, जिसमें अच्छा आचरण, नैतिक मूल्यों के प्रति सम्मान और मानवता की भावना हो। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा चरित्र निर्माण और नैतिकता पर आधारित होती है, तभी वह समाज में सौहार्द, शांति और एकता को बढ़ावा दे सकती है। रक्षा मंत्री के मुताबिक, आज के समय में यह आत्मचिंतन का विषय है कि क्या हमारी शिक्षा प्रणाली बच्चों और युवाओं को एक जिम्मेदार नागरिक बना पा रही है या नहीं।

दुनिया इस समय चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर से गुजर रही है

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने देश और दुनिया में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर से गुजर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और अन्य आधुनिक तकनीकें हमारे जीवन और काम करने के तरीकों को पूरी तरह बदल रही हैं। ऐसे में शिक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अपडेट करना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि इन तकनीकों के इस्तेमाल के साथ नैतिकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तकनीक के साथ संस्कार नहीं होंगे, तो उसका दुरुपयोग समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि आज जरूरत है ऐसी शिक्षा व्यवस्था की, जो ज्ञान, तकनीक और कौशल के साथ-साथ अच्छे मूल्य, चरित्र और मानवता का भी विकास करे। तभी हम एक सुरक्षित, समरस और जिम्मेदार समाज का निर्माण कर सकते हैं, जो आतंकवाद और हिंसा जैसी प्रवृत्तियों का डटकर मुकाबला कर सके।

Team The Loktantra

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लोकतंत्र की मूल भावना के अनुरूप यह ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां स्वतंत्र विचारों की प्रधानता होगी। द लोकतंत्र के लिए 'पत्रकारिता' शब्द का मतलब बिलकुल अलग है। हम इसे 'प्रोफेशन' के तौर पर नहीं देखते बल्कि हमारे लिए यह समाज के प्रति जिम्मेदारी और जवाबदेही से पूर्ण एक 'आंदोलन' है।

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