द लोकतंत्र : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को रेड फोर्ट के पास हुए भीषण कार ब्लास्ट मामले की जांच अब तेजी से आगे बढ़ रही है। इस आतंकी हमले में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और दिल्ली पुलिस की जांच में यह हमला जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से जुड़ा आतंकी कृत्य साबित हुआ है। इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (जिसे सुसाइड बॉम्बर माना जा रहा है) के कॉल डिटेल खंगालने के दौरान उसका सीधा कनेक्शन उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा क्षेत्र से जुड़ा पाया गया।
बिलाली मस्जिद के इमाम हिरासत में
इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई की है।
- दबिश: शुक्रवार देर रात दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम के साथ ही एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) दिल्ली की टीम ने बनभूलपुरा में दबिश देकर बिलाली मस्जिद के इमाम को हिरासत में ले लिया।
- दिल्ली रवाना: पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इमाम को पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने फिलहाल इमाम की दिल्ली ब्लास्ट में भूमिका के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन यह हिरासत साजिश की गहराई की ओर इशारा करती है।
- क्षेत्र में हलचल: शनिवार की सुबह एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल और सीओ लालकुआं दीपशिखा अग्रवाल सहित भारी पुलिस बल की अचानक मौजूदगी से बनभूलपुरा क्षेत्र में हलचल बढ़ गई। बिलाली मस्जिद सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात किया गया है।
जाँच और गिरफ्तारियों का सिलसिला
दिल्ली पुलिस और एनआईए इस मामले में लगातार लोगों को हिरासत में ले रही है।
- कुल गिरफ्तारियाँ: एनआईए ने अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 6 गिरफ्तारियाँ 20 नवंबर को की गई थीं, जबकि 2 गिरफ्तारियाँ 28-29 नवंबर को हल्द्वानी से हुई हैं।
- स्लीपर सेल की आशंका: आतंकी उमर के उत्तराखंड कनेक्शन से यह संकेत मिलता है कि जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन देश के शांत माने जाने वाले क्षेत्रों में भी अपने स्लीपर सेल और समर्थक नेटवर्क को स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की गहनता से जांच कर रही हैं कि क्या इमाम ने उमर को कोई लॉजिस्टिक सपोर्ट, आर्थिक मदद या सुरक्षित पनाह मुहैया कराई थी।
हल्द्वानी में इमाम की हिरासत से यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली ब्लास्ट की साजिश की जड़ें राजधानी से बाहर भी फैल चुकी हैं। इस संवेदनशील मामले में अंतिम सत्य जानने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की जाँच पर पूरे देश की नज़र बनी हुई है।

