द लोकतंत्र/ पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में गुरुवार (06 नवंबर) को 18 जिलों की 121 सीटों पर शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हुआ। पटना की सियासी सरज़मीं पर नेताओं का मतदान केंद्रों पर पहुंचना चर्चा में रहा, लेकिन मतदान के एक दिन बाद LJP (रामविलास) सांसद शांभवी चौधरी एक तस्वीर के चलते विवादों में घिर गईं।
शांभवी चौधरी की वह फोटो, जिसमें उनके दोनों हाथों की उंगलियों पर वोटिंग इंक दिखाई दे रही है, सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बीजेपी और NDA पर गंभीर आरोप लगाए।
पहली बार चुनाव में दोनों उंगलियों में इंक लगाई जा रही है
शांभवी चौधरी, जेडीयू नेता अशोक चौधरी और उनकी पत्नी नीता चौधरी ने पटना के बुद्धा कॉलोनी स्थित सेंट पॉल स्कूल मतदान केंद्र पर जाकर वोट डाला। मतदान के बाद शांभवी ने कैमरे के सामने जीत का इशारा करते हुए दोनों हाथ उठाए लेकिन दोनों हाथों की उंगलियों पर स्याही का निशान देखकर विपक्ष हमलावर हो गया।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने X पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा, बिहार में NDA की सांसद शांभवी चौधरी… पहली बार चुनाव में दोनों उंगलियों में इंक लगाई जा रही है। यह लोग चुनाव और लोकतंत्र की कितनी धज्जियां उड़ाएंगे?
आरजेडी प्रवक्ता कंचना बोलीं – यह अलग स्तर का फ्ऱॉड है
इसके बाद आरजेडी प्रवक्ता कंचना यादव ने एक वीडियो शेयर करते हुए आरोप लगाया कि शांभवी ने दो बार वोट डाला। उन्होंने लिखा यह अलग स्तर का फ्ऱॉड है। दोनों हाथों पर स्याही का मतलब क्या है? चुनाव आयोग कार्रवाई कब करेगा? कंचना यादव ने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो में शांभवी के पिता अशोक चौधरी उन्हें इशारों में संकेत दे रहे हैं, मानो स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हों।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स ने सवाल किया कि क्या शांभवी ने दो बार वोट किया? एक यूजर ने लिखा, एक साल में दो जगह वोट तो BJP नेताओं द्वारा देखा ही है, लेकिन एक ही बूथ पर दो बार वोट? दोनों हाथों पर स्याही कैसे लग गई?
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
वहीं कुछ यूजर्स ने तंज करते हुए इसे ज्ञानेश कुमार इलेक्शन मॉडल करार दिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। हालांकि, अब तक शांभवी चौधरी या LJP (RV) की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। इलेक्शन कमीशन की तरफ से भी अभी इस पर कोई बयान नहीं आया है।
बिहार चुनाव के इस शुरुआती चरण में यह मामला तेजी से राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है। जहां विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष की चुप्पी ने सस्पेंस और बढ़ा दिया है। अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर हैं क्या यह मामला सिर्फ कैमरा एंगल की गलतफहमी है या सच में चुनाव नियमों का उल्लंघन?

