द लोकतंत्र : फरीदाबाद में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद (JeM) मॉड्यूल में गिरफ्तार डॉ. शाहीन शाहिद को लेकर जाँच एजेंसियों को बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि शाहीन पिछले कई महीनों से एक फर्जी पते पर लिया गया मोबाइल सिम इस्तेमाल कर रही थी। यह सिम उसके अधिकांश संदिग्ध संपर्क और आतंकी गतिविधियों में उपयोग हो रहा था। इस खुलासे के बाद जाँच एजेंसियों की शंकाएँ और गहरी हो गई हैं कि यह केवल एक साधारण अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली एक गहन साज़िश है।
जाँच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाहीन शाहिद ने यह सिम कार्ड वर्ष 2023 में फरीदाबाद के धौज कस्बे की एक मस्जिद के पते पर लिया था। यह पता न तो उसका स्थायी निवास था और न ही वह उस इलाके से जुड़ी हुई थी। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहने के दौरान भी उसने इसी नंबर का प्रयोग सर्वाधिक किया। फर्जी पते का यह सुनियोजित उपयोग उसकी गतिविधियों को गोपनीय रखने और जाँच एजेंसियों से छिपाने का एक स्पष्ट प्रयास माना जा रहा है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्यों की आतंकवाद निरोधी एजेंसियों (ATS) ने संयुक्त रूप से गहन जाँच का आदेश दिया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ऐसे मामलों में फर्जी पहचान और गैर-कानूनी संपर्कों का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। एजेंसियों का ध्यान अब शाहीन के सभी डिजिटल फुटप्रिंट्स और उसके यूपी कनेक्शनों को खंगालने पर केंद्रित है, ताकि इस जैश मॉड्यूल के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी पते पर सिम कार्ड का आसानी से प्राप्त होना देश में साइबर सुरक्षा मानकों और KYC (नो योर कस्टमर) सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पूर्व पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) श्री वी. के. सिंह के अनुसार, “यह एक सामान्य रणनीति है जिसका उपयोग आतंकी संगठन अपनी पहचान छिपाने के लिए करते हैं। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि दूरसंचार कंपनियों द्वारा केवाईसी मानदंडों का सख्ती से पालन हो, अन्यथा ऐसे मामले राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए निरंतर खतरा बने रहेंगे।”
जाँच में शाहीन के कई और संदिग्ध पहलू सामने आए हैं। उसने कभी भी अपने लखनऊ स्थित पिता के घर को स्थायी पता नहीं बताया, बल्कि हमेशा अपने भाई डॉ. परवेज अंसारी के घर का पता इस्तेमाल किया। परवेज अंसारी का नाम भी संदिग्ध गतिविधियों के कारण जाँच के दायरे में है। इसके अतिरिक्त, 2013 में कानपुर की नौकरी छोड़ने के बाद उसकी थाईलैंड यात्रा का उद्देश्य भी संदिग्ध है। एजेंसियां पता लगा रही हैं कि इस यात्रा के दौरान वह किन विदेशी संपर्कों से मिली थी।
डॉ. शाहीन शाहिद की गिरफ्तारी और उसके पास से AK-47 तथा पिस्टल जैसे घातक हथियार की बरामदगी के बाद इस जैश मॉड्यूल की साज़िश की गंभीरता स्पष्ट है। फर्जी सिम का उपयोग, संदिग्ध भाई से संपर्क और विदेश यात्रा के नए खुलासे यह दर्शाते हैं कि यह एक सुव्यवस्थित और व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, जाँच एजेंसियों को इस महिला सदस्य से जुड़े पूरे नेटवर्क और साज़िश के हर पहलू को गहराई से उजागर करना अनिवार्य है।

