द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रही है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक में देश की आंतरिक तैयारियों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था पर गहन समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि वैश्विक हालात का सीधा असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर न पड़े।
बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता देश के नागरिकों को हर परिस्थिति में सुरक्षित और सुविधाजनक जीवन देना है। उन्होंने अफवाहों और गलत सूचनाओं को लेकर भी सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए और कहा कि जनता तक समय पर और सटीक जानकारी पहुंचाना बेहद आवश्यक है। इस उच्चस्तरीय बैठक में Rajnath Singh, Amit Shah, Nirmala Sitharaman और S. Jaishankar सहित कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए।
आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार की रणनीति
बैठक के दौरान ऊर्जा संसाधनों और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर सरकार ने भरोसा जताया कि देश में कोयले का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। इसके साथ ही LPG और LNG की आपूर्ति को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से सुनिश्चित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने और बिजली क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए भी कई विकल्पों पर विचार किया। इसके अलावा, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को स्थिर रखने के लिए जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कृषि से लेकर MSME तक, हर सेक्टर पर फोकस
सरकार ने इस बैठक में कृषि, उर्वरक, परिवहन, एविएशन, लॉजिस्टिक्स और MSME जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संभावित चुनौतियों का भी आकलन किया। उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए यूरिया उत्पादन को जारी रखने और DAP/NPK जैसे उर्वरकों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बेहतर तालमेल के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके। सरकार का प्रयास है कि वैश्विक संकट के बावजूद देश के भीतर आर्थिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलती रहें और आम नागरिकों को राहत मिलती रहे। इस पूरी कवायद से साफ है कि केंद्र सरकार संभावित संकटों को पहले ही भांपकर उनके समाधान की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।

