द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : गुजरात की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई वाली भाजपा सरकार जल्द ही कैबिनेट विस्तार करने जा रही है। उससे पहले गुरुवार को राज्य सरकार के सभी मंत्रियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया, जिससे नई टीम के गठन का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि इस फेरबदल में करीब 10 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, जबकि मौजूदा मंत्रियों में से लगभग आधे को बदला जा सकता है।
कल नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह
सूत्रों के अनुसार, नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह शुक्रवार सुबह 11:30 बजे होगा। वर्तमान में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ 17 मंत्री कैबिनेट में हैं जिनमें 8 कैबिनेट मंत्री और 8 राज्य मंत्री (MoS) शामिल हैं। संविधान के अनुसार, 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 27 हो सकती है, यानी अभी सरकार के पास 10 नए चेहरों को जोड़ने की पूरी गुंजाइश है।
यह कदम भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलावों के बाद पार्टी अब सरकार में भी नया संतुलन बनाने की तैयारी में है। कुछ दिन पहले ही जगदीश विश्वकर्मा को गुजरात भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जिन्होंने सी.आर. पाटिल की जगह ली है। यह बदलाव संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
गुजरात मॉडल ऑफ़ रिन्यूअल
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह भाजपा के पारंपरिक ‘गुजरात मॉडल ऑफ़ रिन्यूअल’ की ही एक और मिसाल है। 2021 में भी विधानसभा चुनाव से करीब 15 महीने पहले पूरी कैबिनेट को बदला गया था, जब विजय रूपाणी की जगह भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया था। अब जबकि अगला चुनाव करीब 26 महीने दूर है, पार्टी एक बार फिर एंटी-इनकंबेंसी (जन असंतोष) को खत्म करने और नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में दिख रही है।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रिकॉर्ड 156 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी। उस समय पार्टी ने 103 नए चेहरों को टिकट देकर जोखिम उठाया था, जो अंततः उसके लिए फायदेमंद साबित हुआ। अब वही रणनीति दोहराते हुए भाजपा फिर से युवा और नए चेहरों पर दांव लगाने जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गुजरात में चेहरे बदलने की परंपरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल से ही चली आ रही है। हर चुनाव से पहले भाजपा कैबिनेट में बदलाव कर जनता के असंतोष को कम करने और नई ऊर्जा से चुनावी मोर्चा मजबूत करने की रणनीति अपनाती रही है। इस बार भी कैबिनेट विस्तार उसी नीति की कड़ी है, जिसके तहत पार्टी “नया जोश, नई टीम” के साथ आगे बढ़ना चाहती है।

