द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की अहम बैठक में पार्टी के शीर्ष नेता एक मंच पर जुटे, जहां राजनीतिक रणनीति और केंद्र सरकार के निर्णयों पर तीखी चर्चा हुई। बैठक में कांग्रेस संसदीय दल अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, शशि थरूर, जयराम रमेश, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र रहा मनरेगा, जिसे लेकर कांग्रेस नेतृत्व ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
मनरेगा को खत्म करने का फैसला कैबिनेट की सलाह के बिना
बैठक के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि मनरेगा को खत्म करने का फैसला कैबिनेट की सलाह के बिना सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लिया। राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल एक योजना नहीं थी, बल्कि अधिकार आधारित गारंटी थी, जिसने ग्रामीण भारत में करोड़ों लोगों को रोजगार सुरक्षा दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट में बैठे ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई। राहुल ने कहा, वन मैन शो चल रहा है, मोदी जो फैसला लेते हैं वही होता है। यह कदम नोटबंदी की तरह विनाशकारी है और संघीय ढांचे पर हमला है।
कांग्रेस का संकेत, सड़क से संसद तक होगा आंदोलन
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक में मोदी सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण भारत का चेहरा बदला, पलायन रोका और कमजोर वर्गों को सुरक्षा दी। यह दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना रही है, जिसने दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों को सम्मानजनक आजीविका दी। खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने किसानों के आंदोलन में उनका साथ दिया था और अंत में कृषि कानून वापस करवाए अब मनरेगा बहाली भी तय है।
खरगे ने यह भी कहा कि यह समय केवल चिंता करने का नहीं, बल्कि जन-आंदोलन खड़ा करने का है। उन्होंने पार्टी नेताओं से अभियान को गांव-गांव तक ले जाने की अपील की और दावा किया कि सरकार के इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध तेज होगा। बैठक में यह भी चर्चा रही कि मनरेगा पर सरकार का कदम सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण और निर्णय प्रक्रिया के लोकतांत्रिक ढांचे के कमजोर होने की ओर संकेत करता है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी।
कुल मिलाकर CWC की बैठक में कांग्रेस ने मनरेगा के मुद्दे पर बड़ा आक्रामक मोर्चा खोल दिया है, और संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में केंद्र की आर्थिक नीतियां और ग्रामीण मुद्दे कांग्रेस की राजनीति के मुख्य केंद्र में रहने वाले हैं।

