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पड़ोसी देशों के साथ नीति में संतुलन बना रहा भारत, आतंकवाद पर सख्त रुख जरूरी: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

India has maintained a balanced approach in its policy towards neighboring countries, but a firm stance on terrorism is necessary: ​​External Affairs Minister S. Jaishankar

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली: भारत अपनी पड़ोसी देशों से जुड़ी नीति को नए सिरे से संतुलित कर रहा है, जिसमें मानवीय सहायता, विकास सहयोग और सुरक्षा से जुड़े खतरों पर सख्त जवाब तीनों को समान महत्व दिया जा रहा है। यह बात विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को IIT मद्रास में आयोजित टेक्नो-एंटरटेनमेंट फेस्ट Shaastra 2026 के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने स्वाभाविक रूप से उन्हीं देशों में निवेश किया है, जिनके साथ उसके सहयोगात्मक और सकारात्मक संबंध रहे हैं।

मानवीय सहायता और विकास सहयोग पर भारत का जोर

जयशंकर ने कहा कि भारत ने हमेशा अपने पड़ोसी देशों के साथ ‘एक अच्छे पड़ोसी’ की तरह व्यवहार किया है। उन्होंने याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान कई पड़ोसी देशों को उनकी पहली वैक्सीन खेप भारत से ही मिली। इसके अलावा यूक्रेन युद्ध के समय जब वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो गई थी, तब भारत ने कई देशों को खाद्य सहायता भी उपलब्ध कराई।

उन्होंने श्रीलंका का उदाहरण देते हुए कहा कि आर्थिक संकट के दौरान भारत ने उसे 4 अरब अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की। हाल ही में आए चक्रवात के दौरान भी भारत ने बिना देरी किए राहत और बचाव कार्यों में मदद की। जयशंकर ने कहा, “यही अच्छे पड़ोसी का कर्तव्य होता है।”

आतंकवाद के साथ सामान्य रिश्ते संभव नहीं

हालांकि विदेश मंत्री ने यह भी साफ किया कि सीमा पार आतंकवाद कुछ पड़ोसी देशों के साथ सामान्य संबंधों में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा का पूरा अधिकार है। जयशंकर ने कहा, अगर आप दशकों तक आतंकवाद का सामना करते हैं, तो अच्छे पड़ोसी संबंध नहीं हो सकते। आप ऐसे देश के साथ न तो पानी साझा कर सकते हैं और न ही सहयोग, जो लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता हो। यह बयान स्पष्ट रूप से भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

बांग्लादेश, अफगानिस्तान और चीन पर भारत का रुख

बांग्लादेश को लेकर जयशंकर ने कहा कि भारत वहां के चुनावों के लिए शुभकामनाएं देता है और उम्मीद करता है कि हालात सामान्य होने के बाद अच्छे पड़ोसी संबंध आगे भी जारी रहेंगे। अफगानिस्तान पर बोलते हुए उन्होंने भारत और अफगान जनता के बीच सभ्यतागत संबंधों का उल्लेख किया और कहा कि वहां के लोग कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान के अपने समकक्ष के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही है और उन्हें भरोसा है कि समय के साथ हालात बेहतर होंगे।

चीन से जुड़े एक सवाल पर जयशंकर ने कहा कि नवंबर में शंघाई एयरपोर्ट पर अरुणाचल प्रदेश की एक महिला के साथ चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार पर भारत ने आधिकारिक तौर पर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने दोहराया, अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है और हमेशा रहेगा। हम उम्मीद करते हैं कि अन्य देश अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों का सम्मान करें।

व्यक्तिगत जीवन और संतुलन पर हल्का-फुल्का बयान

कार्यक्रम के अंत में जयशंकर ने अपने निजी जीवन पर भी हल्के-फुल्के अंदाज में बात की। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में कोई ‘ऑफ डे’ नहीं होता, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय राजनीति सप्ताहांत नहीं देखती। उन्होंने कहा कि वे संगीत सुनते हैं, किताबें पढ़ते हैं, फिल्में देखते हैं और खेलों में रुचि रखते हैं ताकि जीवन में संतुलन बना रहे। हालांकि उन्होंने मुस्कुराते हुए जोड़ा कि उनकी पत्नी इस बात से असहमत भी हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, जयशंकर के बयान से यह साफ होता है कि भारत की पड़ोसी नीति सहयोग और करुणा के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता पर आधारित है, और आने वाले समय में यही संतुलन भारत की विदेश नीति की दिशा तय करेगा।

Team The Loktantra

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