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India-Pakistan Ceasefire: चीन ने मध्यस्थता का दावा किया, भारत ने सिरे से खारिज किया

India-Pakistan Ceasefire: China claimed to have mediated, but India completely rejected the claim.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्षविराम (India-Pakistan Ceasefire) को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद चीन ने भी दावा किया कि उसने दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।

हालांकि भारत ने इन दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सीजफायर पूरी तरह भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी बातचीत से हुआ और किसी तीसरे देश का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं था। भारत का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान स्वयं वार्ता के लिए आगे आया और डीजीएमओ स्तर पर चर्चा के बाद संघर्षविराम तय हुआ।

चीन के बयान पर भारत की दो-टूक प्रतिक्रिया

यह मामला तब गर्मा गया जब चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बयान दिया कि चीन ने म्यांमार, ईरान न्यूक्लियर इश्यू, इजरायल-फिलिस्तीन विवाद समेत भारत-पाक तनाव में भी मध्यस्थता की है। चीन ने अमेरिका के दावे को समर्थन देते हुए खुद की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

इस बयान के बाद भारतीय सरकारी सूत्रों ने NDTV से कहा कि भारत हमेशा से स्पष्ट कर चुका है कि भारत-पाक विवाद द्विपक्षीय मुद्दा है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई आवश्यकता नहीं। सूत्रों ने दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने भारत के DGMO से संपर्क किया, जिसके बाद ceasefire की तारीख, समय और भाषा तय की गई।

भारत की नीति- ‘कोई तीसरा पक्ष नहीं’

भारत लंबे समय से पाकिस्तान के साथ विवादों को द्विपक्षीय ढांचे के भीतर सुलझाने की नीति पर कायम है। कश्मीर से लेकर LOC तनाव तक भारत बार-बार कह चुका है कि मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं, और यही सिद्धांत इस संघर्षविराम में भी लागू हुआ। सरकार ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की संभावना को पूरी तरह नकारते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि इस युद्धविराम की सफलता दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के स्तर पर हुई बातचीत का परिणाम है।

विदेश मंत्रालय ने प्रेस ब्रीफिंग में भी साफ किया था मामला

13 मई 2025 की प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से कहा था कि संघर्षविराम की घोषणा दोनों देशों के DGMO के बीच हुई सीधी वार्ता से तय हुई थी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी सरकार या अंतरराष्ट्रीय संस्था की इसमें कोई भूमिका नहीं रही।

Team The Loktantra

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