द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : लोकसभा में बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कांग्रेस पर भारतीय किसानों को नुकसान होने का झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया और कहा कि हालिया किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से किसानों को नुकसान नहीं हुआ है।
सदन में बोलते हुए शाह ने कहा कि विपक्ष यह दावा कर रहा है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ है, जबकि यह पूरी तरह भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित बयान है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता रही है और किसी भी समझौते में उनके हितों से समझौता नहीं किया गया।
गृह मंत्री ने कहा कि किसानों से जुड़ी असली समस्या वर्ष 2013 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में हुई बातचीत के दौरान पैदा हुई थी, जब तत्कालीन सरकार ने खाद्य सुरक्षा और कृषि सहायता से जुड़े कुछ प्रावधानों को स्वीकार किया था। उनके अनुसार, उस समय लिए गए फैसलों ने भारतीय किसानों को जोखिम में डाल दिया था। अमित शाह ने दावा किया कि बाद में जब केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार आई, तो उसने हस्तक्षेप करते हुए किसानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के किसानों के हितों की मजबूती से रक्षा की है।
विपक्ष के प्रदर्शन और स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर भी निशाना
लोकसभा में अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, के हालिया विरोध प्रदर्शनों पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कांग्रेस के ‘शर्टलेस प्रोटेस्ट’ का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार विरोध जताने के लिए इस तरह के तरीके अपनाती है। शाह ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसके लिए दिल्ली में जंतर-मंतर जैसे निर्धारित स्थान मौजूद हैं। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने विरोध के दौरान ऐसी जगहों का चयन किया, जिससे देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
गृह मंत्री ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रस्ताव संवैधानिक संस्थाओं पर अनावश्यक संदेह पैदा करते हैं। शाह के अनुसार, विपक्ष का यह कदम चुनाव आयोग, न्यायपालिका और संसद की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
उन्होंने सांसदों से अपील की कि स्पीकर के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को बहुमत से खारिज किया जाए और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने दिया जाए। इसके बाद सदन में शोर-शराबे के बीच लोकसभा ने विपक्ष के प्रस्ताव को ध्वनि मत से खारिज कर दिया। उस समय पीठासीन अधिकारी के रूप में बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे थे। विपक्षी सांसदों के नारेबाजी के बीच उन्होंने वॉयस वोट कराया और घोषणा की कि प्रस्ताव अस्वीकृत हो गया है।

